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यादों के झरोखे

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मेरे इस काव्य संग्रह यादों के झरोखे में प्रेम, वियोग, धर्म, समाज और सत्य सभी एक-दूसरे से गुथे हैं। कभी प्रार्थना बनकर, तो कभी सत्य के संवाद में । ये कविताएं मेरी यात्रा के हिस्सा हैं, इन कविताओं में मेरे जीवन के विविध क्षणों की झलक हैं, कहीं बचपन की यादें हैं, कहीं स्मृतियों की गहराई है, कहीं गाँव की मिट्टी की खुशबू, कहीं अकेलेपन का दर्द है तो कहीं प्रेम और आशा की किरण। यह सब मेरे मन की बातें हैं, जिन्हें मैं अब आपके साथ बांटना चाहता हूं। इन कविताओं में मैंने स्वयं को लिखा है, और शायद आप स्वयं को पाएंगे ।

86 pages, Kindle Edition

Published October 21, 2025

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Prakash Kumar

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