“ज़िंदगी वर्दी में” — एक सिपाही का सफ़र, जो सीमा से दिल तक जाता है।
यह किताब सिर्फ एक जवान की कहानी नहीं है, बल्कि हर उस भारतीय की आवाज़ है, जो सरहद पर तैनात बेटे की सलामती की दुआ रोज करता है।
एक युवा का सपना वर्दी तक कैसे पहुँचता है? कड़क ट्रेनिंग, पहली पोस्टिंग, परिवार से दूरी, सरहद की सर्द हवाएँ, रात की पेट्रोलिंग, नक्सल क्षेत्रों का तनाव, दंगों का सामना, चुनाव ड्यूटी की चुनौतियाँ— यह सब एक सिपाही की असली ज़िंदगी को बेहद ईमानदारी से पेश करता है।
इस किताब में आप पढ़ेंगे:
✔ वर्दी पहनने का सपना कैसे जन्म लेता है ✔ सीमा पर तैनाती का पहला डर और पहला साहस ✔ दुश्मन नहीं, परिस्थितियों से लड़ने की असली जंग ✔ स्मगलिंग रोकने की पहली बड़ी सफलता ✔ अरुणाचल प्रदेश के दंगो&