रामविलास शर्मा (1912-2000) हिन्दी आलोचना, विशेषतौर से मार्क्सवादी हिन्दी आलोचना के प्रमुख स्तम्भों में एक हैं। उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता असंदिग्ध रही है। एक आलोचक और सिद्धान्तकार के रूप में उनका साहित्य विपुल है। सौ से अधिक पुस्तकों का लेखन-सम्पादन करने वाले रामविलास शर्मा की आलोचना के दो पक्ष स्वीकार किये गये हैं-खण्डन पक्ष और स्थापित करने वाला पक्ष।