मराठी के अग्रणी कहानीकार जयंत पवार को ये लंबी कहानियाँ हाशिये बाहर के आदमी को आस्था तथा सम्मान के साथ केंद्र में रख कर मानवीयता के चरम बिंदु पर जाकर लिखी गयी जीवन गाथाएँ हैं।
ये कहानियाँ सत्ता, शोषण और साहित्य के अंतर्सबंधों की सही परख की खोज का प्रयास करती हैं। इसलिए सत्ता से निरंतर दूर रखे गये आदमी के जीवन की त्रासदियों को केंद्र में रखती हैं। शहरी परिवेश को भरी-पूरी दुनिया में साधनहीन आदमी के अकेलेपन का विकराल रूप इन कहानियों में दिखाई देता है। जयंत पवार कहानी को मानव जीवन की जटिलता से और विषमता से जूझने का हथियार मानते हैं। मिथकों की संरचना भी सत्ता का एक रूपक होता है, यह जान कर वे मिथकों की रचना पर सवाल उठते हैं और उनसे अलग अर्थ प्रसृत करवाते हैं। कहानी क