Jump to ratings and reviews
Rate this book

संयम [Sanyam]

Rate this book
‘हर पेंटिंग अपने भीतर एक चुप्पी छुपाए रखती है — और हर कलाकार, एक छुपी हुई कथा।‘
संयम एक ऐसे पेंटर की कहानी है, जो जीवन की भीड़ में भीतर से बिल्कुल अकेला है।

वह रंगों से अपनी दुनिया बनाता है, लेकिन जब वे भी चुप हो जाते हैं, तो उसे शब्दों का सहारा लेना पड़ता है।

उसकी एक दोस्त उसे कहती है—"लिखो। जो तुमने महसूस किया, जो कह नहीं पाए—उसे लिखो।"

यह उपन्यास उसी आत्म-संवाद की यात्रा है।

यह केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि एक चित्रकार के भीतर की वह आवाज़ है, जो कभी पेंटिंग के ज़रिए नहीं निकल पाई।

यह उस गहरी खामोशी की भाषा है, जिसे हम सब कभी न कभी महसूस करते हैं—चाहे हम कलाकार हों या नहीं।

क्या एक लेखक एक पेंटर को समझ सकता है? क्या हम कभी किसी के रंगों की भाषा पढ़ सकते हैं? यही प्रश्न इस किताब के हर पन्ने में झलकता है।

संयम मानव कौल का सबसे आत्मिक और अंतरंग उपन्यास है—जहाँ कैनवास शब्द बन जाता है, और अकेलापन कहानी।

192 pages, Paperback

Published July 18, 2025

1 person is currently reading
7 people want to read

About the author

Manav Kaul

32 books412 followers
कश्मीर के बारामूला में पैदा हुए मानव कौल, होशंगाबाद (म.प्र.) में परवरिश के रास्ते पिछले 20 सालों से मुंबई में फ़िल्मी दुनिया, अभिनय, नाट्य-निर्देशन और लेखन का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं। अपने हर नए नाटक से हिंदी रंगमंच की दुनिया को चौंकाने वाले मानव ने अपने ख़ास गद्य के लिए साहित्य-पाठकों के बीच भी उतनी ही विशेष जगह बनाई है। इनकी पिछली दोनों किताबें ‘ठीक तुम्हारे पीछे’ और ‘प्रेम कबूतर’ दैनिक जागरण नीलसन बेस्टसेलर में शामिल हो चुकी हैं।

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
6 (30%)
4 stars
11 (55%)
3 stars
3 (15%)
2 stars
0 (0%)
1 star
0 (0%)
Displaying 1 - 2 of 2 reviews
Profile Image for Shashwat Ratna Mishra.
83 reviews1 follower
December 29, 2025
संयम एक ऐसे पेंटर की कहानी है जो जीवन में बहुत अकेला है, लेकिन अपनी पेंटिंग्स के ज़रिये अपने भीतर चल रहे भावों को असली रूप दे पाता है। बचपन से ही उसे चित्र बनाने का शौक होता है, और जब उसकी ज़िंदगी में एक अच्छा गुरु आता है, तो वही उसे सही दिशा और आत्मविश्वास देता है। उस गुरु की बनाई गई पेंटिंग कहानी का एक बेहद ख़ास और भावनात्मक हिस्सा बन जाती है जो सिर्फ़ एक चित्र नहीं, बल्कि एक गहरे रिश्ते और कृतज्ञता का प्रतीक लगती है। यह किताब पेंटिंग तक सीमित नहीं है; इसमें आत्मचिंतन, रिश्ते, अकेलापन, और इंसान के भीतर चलने वाली खामोश जद्दोजहद को भी बहुत सादगी से दिखाया गया है। कुछ सहायक पात्र भी हैं, जो कहानी को और मानवीय बना देते हैं।

हमेशा की तरह मानव कौल की भाषा बेहद सरल है, लेकिन बातों के अर्थ गहरे हैं। यही वजह है कि किताब भारी नहीं लगती, बल्कि धीरे-धीरे मन में उतरती जाती है। कुल मिलाकर, संयम एक हल्की लेकिन संवेदनशील पढ़ाई है, जिसे आप आराम से 1.. 2... दिन में पढ़ सकते हैं। अगर आपको कला, आत्मनिरीक्षण और शांत कहानियाँ पसंद हैं, तो यह किताब आपको ज़रूर पसंद आएगी।
Profile Image for Abhishek Giri.
11 reviews
March 3, 2026
"संयम"एक बेहतरीन पुस्तक है जो लेखक मानव कौल द्वारा लिखी गई है, जिनकी विशिष्ट लेखन शैली और गहरी सोच के लिए वह प्रसिद्ध है और हमें बेहद पसंद हैं। इस किताब में संयम की महत्ता को बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।
कहानी एक पेंटर (चित्रकार) की है। कि वह अपने रंगों के माध्यम से कैसे मन की अपनी दुनिया और शब्दों कैनवास पर ऐसे सजा देते हैं कि पेटिंग मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती प्रतीत होती है और अपनी ओर आकर्षित करती है।

संयम किताब पाठकों को यह समझने में मदद करती है कि संयम केवल एक नैतिक गुण नहीं है, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। लेखक ने इसके महत्व को इतना प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया है कि पढ़ने के बाद, पाठक अपने जीवन में संयम को अपनाने के लिए प्रेरित महसूस करते हैं।
Displaying 1 - 2 of 2 reviews