राधा–कृष्ण : प्रेम की अनन्त ज्योतिएक ऐसी काव्य–गाथा, जो सिर्फ पढ़ी नहीं जाती—अनुभव की जाती है।वृन्दावन की पगडंडियों, यमुना की लहरों, बाँसुरी की अनहद धुन और राधा के मौन प्रेम को समेटे यह पुस्तक, प्रेम को एक नई दृष्टि से देखने का निमंत्रण देती है।यह प्रेम कहानी “कथा” नहीं, एक आध्यात्मिक अनुभूति है— जहाँ प्रेम किसी रूप, किसी स्पर्श, किसी उम्मीद या बंधन पर नहीं टिकता, बल्कि आत्मा के मुक्त विस्तार में खिलता है।राधा: एक प्रतीक्षा नहीं, एक प्रार्थना हैं।कृष्ण: उस प्रार्थना का दिव्य उत्तर।लेखक ने इस काव्यात्मक गाथा में कृष्ण की बाँसुरी की तान, राधा की तड़प, वृंदावन का शांति गीत, और प्रेम की गहरी अध्यात्मिकता को इस तरह पिरोया है कि पाठक स्वयं इस प्रेम लीला का एक हिस्सा बन जाता है।यह पुस्तक आपको उन प्रश्नों से भी मिलाती है—प्रेम क्या है?समर्पण क्या है?तड़प और मुक्ति में क्या संबंध है?और क्यों राधा–कृष्ण का प्रेम कभी समाप्त नहीं होता?हर पंक्ति, हर दृश्य, हर संवाद मन में एक अनन्त प्रकाश जगाता है, जैसे पुरानी स्मृतियों की धुँध में कहीं एक दीपक अभी भी टिमटिमा रहा हो।यह पुस्तक उन सभी के लिए है—जो आध्यात्मिकता को प्रेम की भाषा में समझना चाहते हैं,जिनके भीतर प्रश्न हैं, जिनका उत्तर शब्दों में नहीं—अनुभूति में मिलता है,जो राधा–कृष्ण के प्रेम को सिर्फ “कथा” नहीं, एक आध्यात्मिक सत्य मानते हैं।यह सिर्फ प्रेम नहीं… प्रेम का सत्य है।