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मैं बदल रही हूँ: Main Badal Rahi Hoon

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"मैं बदल रही हूँ"—यह केवल एक बदलाव की घोषणा नहीं है, बल्कि एक स्त्री के भीतर चल रही लंबी, शांत और साहसी यात्रा की स्वीकृति है । मोना गुप्ता का यह काव्य-संग्रह उन भावनाओं को स्वर देता है जो अक्सर रिश्तों, जिम्मेदारियों और सामाजिक उम्मीदों के शोर में दबी रह जाती हैं।

इन कविताओं के माध्यम से एक नारी के जीवन के विभिन्न पड़ावों—बेटी, बहू, माँ और पत्नी—को उकेरा गया है, जहाँ वह हर भूमिका को निभाते हुए अंततः अपने अस्तित्व की पहचान करती है । यह पुस्तक उन सभी पाठकों के लिए है जो अपने भीतर के मौन को शब्दों में बदलना चाहते हैं ।

इस संग्रह की मुख्य विशेषताएं:

आत्म-पहचान और शक्ति: समाज द्वारा दी गई 'देवी' की पदवी से हटकर एक 'इंसान' के रूप में अपनी पहचान और पंखों को फैलाने की बेताबी

47 pages, Kindle Edition

Published December 16, 2025

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Mona Gupta

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