हर इंसान के अंदर एक अँधेरा तहखाना होता है, जहाँ वह अपनी सबसे गहरी और 'वर्जित' इच्छाओं को छिपाकर रखता है। नीलगढ़ हवेली उसी तहखाने की चाबी है।
रेगिस्तान के सन्नाटे में खड़ी यह हवेली सिर्फ पत्थरों का ढेर नहीं, बल्कि एक जीवित तिलिस्म है। यहाँ की हवाओं में 'रात-रानी' की एक ऐसी मादक गंध घुली है, जो एक बार सांसों में उतर जाए, तो इंसान अपनी दुनिया भूल जाता है।
विक्रम, एक महत्वाकांक्षी युवक, एक नायाब खोज में यहाँ कदम रखता है। लेकिन उसे अंदाज़ा नहीं कि वह एक ऐसे मनोवैज्ञानिक चक्रव्यूह में प्रवेश कर चुका है जहाँ बाहरी दुनिया के नियम मायने नहीं रखते। यहाँ 'शक्ति' और 'समर्पण' का एक क्रूर लेकिन सम्मोहक खेल चलता है।