इस किताब को पब्लिश करने के पीछे मेरा एकमात्र उद्देश्य यह था की, मैं उस 21-22 साल के लड़के से उसका हक नहीं छीन सकता जिसने भेड़-चाल वाली दुनिया में कलम उठाई और लेखन को अपना कार्यक्षेत्र/प्रोफेशन बनाया, वो भी लाखों ताने और विरोध के बावजूद। कहीं ना कहीं मुझे यह भी लगता है इस किताब को पढ़कर नए लेखकों को हौंसला मिलेगा, अगर उनमें से किसी एक के मन में भी यह विचार आ गया की "लेखन का रास्ता उतना मुश्किल नहीं जितना दुनिया कहती है।" तो मैं मानूंगा मैं कामयाब रहा। इस किताब में लिखी सभी ग़ज़लें बहर से ख़ारिज हैं यानी मीटर में नहीं हैं, कोई उस्ताद शायर इसे पढ़ता और मुझे टोकता, मैंने इससे पहले ही अपनी गलती स्वीकार करते हुए किताब का नाम रख दिया "बहर से ख़ारिज"