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पड़ाव भी मंजिल है

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जीवन में हमारे आसपास ऐसा बहुत कुछ घटता है या हम बहुत से ऐसे किरदारों से मिलते हैं जो हमें बेचैन कर देते हैं, एक दिन वह बेचैनी इतनी बढ़ जाती है कि शब्दों के रास्ते पन्नों पर उतर जाती है। इस किताब की बात करूं तो कहीं ना कहीं यह उसी बेचैनी का परिणाम है, मुंबई में मल्टी नेशनल एड एजेंसी में जॉब के दौरान, फिल्म इंडस्ट्री में काम खोजने (स्ट्रगल) के दौरान, ज्योतिषीय परामर्श के दौरान, मनोविज्ञान से एमए करने के दौरान कई बार ऐसे लोगों से मिलना हुआ जिन्हें देखकर लगा, इनकी कहानी से दूसरों को हौंसला, सबक, हिम्मत मिल सकती है ठीक वैसे जैसे मुझे मिली। इन कविताओं की वजह से मेरे जीवन में भी अच्छा-खासा बदलाव आया, दुनिया की भेड़ चाल से खुद को अलग कर पाने और बाजार के प्रभाव से बचने में मुझे आंशिक सफलता मिली, इस यात्रा क

204 pages, Kindle Edition

Published December 26, 2025

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Vipul Joshi

13 books

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