उपन्यास - नया नशा"कुछ रिश्ते समाज की नज़रों में 'गुनाह' होते हैं, लेकिन बंद कमरों में वही 'सुकून' बन जाते हैं।"
40 वर्षीय मीरा के लिए ज़िंदगी का मतलब सिर्फ़ जिम्मेदारियां और तन्हाई थी। एक तलाकशुदा माँ और एक नर्स होने के नाते, उसने अपनी इच्छाओं को अपने दिल के किसी कोने में दफ़न कर दिया था। उसे लगा था कि उसके हिस्से का बसंत अब बीत चुका है।
लेकिन 'लाइफकेयर नर्सिंग होम' के वार्ड नंबर 3 में उसका सामना एक ऐसे तूफ़ान से हुआ, जिसने उसकी सूखी हुई दुनिया में बाढ़ ला दी।
कबीर। 22 साल का एक ऐसा युवक, जिसकी आँखों में मीरा के लिए 'इज़्ज़त' से ज़्यादा एक 'जानलेवा भूख' थी।
उसने मीरा को यह अहसास दिलाया कि वह सिर्फ़ एक 'माँ' नहीं, बल्कि एक बेहद आकर्षक 'स्त्री' है। एक छोटा सा इलाज धीरे-धीरे एक वर्जित रिश्तí