इस चिंतन में डॉक्टर बाबासाहब आंबेडकर ने हर व्यक्ति के सामरिक और सकारात्मक मोक्ष की बात की है, जो वैचारिक दृष्टि से मुझे सही लगती है, तब वे जब कहते है की मनुष्य को शक्ति जन से, धन से और मन से मिलती है। इन सबके लिए सही शिक्षा, रोजगार और मनोरंजन का होना अत्यंत आवश्यक है, और अबके शिक्षा, रोजगार और मनोरंजन के जिस स्तर को मैं अपने समाज में देखे जा रहा हूँ, मुझे ऐसा प्रतीत होता है, की हमारा अल्पसंख्यक समाज भी बाकि लोगों की तरह ही अपनी उलझनभरी आजीविका साधनों से उदरभरण में कुछ इस तरह से व्यस्त हो गया है की हम लोग महामानव के द्वारा दिए गए निर्देशों, सुझावों और समयावश्यक चेतावनियों को नाटकीय बहाने करते भूल गए है। पर कुछ लोग है, जो उनका साहित्य पढ़ते, उनके निर्देशों, सुझावों और समयावश्यक चेतावनियों पर अमल