जहाँ हिप्नॉटिज़्म मौत का सबसे ख़तरनाक हथियार बन जाता है।
एक ट्रेन का विध्वंस... एक अफ़सर की लाश पर गोदा नेवले का निशान... और एक पागल शैतान जो दिमाग़ को ग़ुलाम बनाकर खेल खेलता है।
विनेश कुमार अब ख़ांडव उत्तराधिकारी है — चार ख़तरनाक परीक्षाओं में जीतकर वह साम्राज्य की कमान संभालने की राह पर है। लेकिन सामने है लाल नेवला — वो ख़ूंख़ार हिप्नॉटिस्ट जो न सिर्फ़ मारता है, बल्कि तुम्हारे सबसे क़रीबी को तुम्हारा ही दुश्मन बना देता है।
प्यार की आग में विश्वासघात, बदले की लपटें, और एक ट्विस्ट जो दिल को चीर देगा — क्या विनेश इस नरक से जीतकर निकलेगा... या लाल नेवला सब कुछ छीन लेगा?
श्रृंखला की पहली किताब ने आपको ख़ांडव की दुनिया में खींचा था — अब दूसरी किताब आपको रातों की नींद छीन लेगी!