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तिहरा नशा: हद से ज़्यादा, उम्मीद से परे... एक नशा....

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उपन्यास - तिहरा नशा

क्या दौलत से 'जुनून' को ख़रीदा जा सकता है? या फिर जुनून दौलत को अपना ग़ुलाम बना लेता है?


मल्लिका के पास सब कुछ था—नाम, पैसा, और लोनावला का एक आलीशान विला। लेकिन उसकी ज़िंदगी उस कोरे कैनवास की तरह थी, जिस पर बरसों से कोई रंग नहीं चढ़ा था। दूसरी तरफ़ था कबीर—एक ग़रीब लेकिन बेबाक पेंटर, जिसकी आँखों में एक अजीब सी आग थी।

जब एक तूफ़ानी रात इन दोनों की दुनिया टकराई, तो अंजाम सिर्फ़ एक साधारण प्रेम कहानी नहीं था। यह शुरुआत थी एक ऐसे 'वर्जित सौदे' की, जिसने समाज की सारी हदों को पार कर दिया।

लेकिन खेल तब बदल गया जब इस रिश्ते में एक 'तीसरा साया' भी शामिल हो गया।

मुंबई के रईस गलियारों से लेकर बंद कमरों के राज़ तक—यह कहानी तीन ज़िंदगियों के एक ऐसे जाल की है जहाँ प्यार, कला औ

154 pages, Kindle Edition

Published December 30, 2025

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