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सेवा ही संकल्प राष्ट्र प्रथम ही प्रेरणा : नरेन्द्र मोदी [Sewa Hi Sankalp Rashtra Pratham Hi Prerna : Narendra Modi]

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सीमित संसाधनों में पला-बढ़ा एक बालक, जो आगे चलकर भारत का प्रधानमंत्री बना और पूरे वैश्विक पटल पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ दी।

ये कैसे हुआ, प्रेरणाएं कहां से मिलीं। इस असाधारण उपलब्धि के पीछे कौन सी सोच काम कर रही थी, वो कौन से अनुभव थे जिन्होंने एक बालक को असाधारण बना दिया, इन्ही जिज्ञासाओं से इस पुस्तक संग्रह (बॉक्स सेट) ‘सेवा ही संकल्प, राष्ट्र प्रथम ही प्रेरणा — नरेन्द्र मोदी’ का जन्म हुआ है।

दुर्लभ फ़ोटोग्राफ़्स और अनसुनी घटनाओं से सजी यह पुस्तक संग्रह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जीवन की अनदेखी झांकी है। चार पुस्तकों और तीन भागों में विभाजित, यह नरेन्द्र दामोदरदास मोदी की कहानी है। ये गुजरात के वडनगर में जन्मे और पले-बढ़े एक कौतूहल से भरे युवा की यात्रा है, जो अपने जन्म-प्रदेश का मुख्यमंत्री बना। लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली ये यात्रा, भविष्य में करोड़ों-अरबों लोगों के जीवन में संभावनाओं का सूर्य बनकर चमकने वाली थी।

इस संग्रह की पहली पुस्तक ‘Seeds of Service - सेवा के बीज’ आपको युवा नरेन्द्र मोदी के प्रारंभिक वर्षों, शुरुआती अनुभवों और उनके जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों में गहराई तक ले जाएगी और उनके संवेदनशील बचपन, युवावस्था, स्वयंसेवक के रूप में यात्रा जैसे विविध पहलुओं से जोड़ेगी।

दूसरी पुस्तक ‘Dedication and Duty - समर्पण और कर्तव्य’ में आपको उनके भारतीय जनता पार्टी में अभूतपूर्व उत्थान, सांगठनिक पुर्नगठन, तबाह हो चुकी मातृभूमि में एक मुसाफिर बेटे की वापसी जैसे कई विषयों की जानकारी होगी। भारतीय जनता पार्टी के सबसे सफल रणनीतिकारों में से एक के रूप में यह उनकी वो यात्रा है, जिसने पार्टी, प्रदेश और देश का युग परिभाषित कर दिया।

इस संग्रह की तीसरी पुस्तक ‘Nagrik Devo Bhava - नागरिक देवो भवः’ एक मुख्यमंत्री के तौर नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात में बद‌लाव और प्रगति की एक अद्वितीय गाथा है। लगातार चार कार्यकालों में व्यापक बहुक्षेत्रीय और बहुआयामी परिवर्तनों की ये कथा अपने आप में प्रेरणा का ज्योति पुंज है।

संग्रह की चौथी व अंतिम पुस्तक ‘यादगार स्मृतियां - Memorable Glimpses’ उनके जन्म से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री बनने तक के विविध क्षणों को चित्रों के माध्यम से सामने लाती है।

इस पुस्तक संग्रह में जनमानस के उन अनुभवों को समाहित किया गया है, जिन्होंने मिलकर 140 करोड़ भारतीयों के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेता को गढ़ा है। यह पुस्तक संग्रह उस ऐतिहासिक मोड़ पर समाप्त होता है, जब नरेन्द्र मोदी, 1947 के बाद पैदा हुए पहले प्रधानमंत्री के रूप में, बतौर सरकार के मुखिया, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर, भारतीय संसद की सीढ़ियों पर झुके थे।

935 pages, Hardcover

Published November 14, 2025

About the author

BlueKraft Digital Foundation is a not-for-profit organisation that is actively working in the realm of policy and governance matters. The foundation brings together a wide spectrum of leading policymakers and citizens to debate, discuss, deliberate and formulate new ideas that will enrich India's development trajectory. Its work is primarily focused on promoting the spirit of voluntary participation in sectors such as holistic education, women and child empowerment, farmer welfare, conservation of the environment, digital and social media, and diasporic relations. BlueKraft also works in the emerging discipline of data science. The foundation is privileged to have a youthful and vibrant team that is committed to public service and the cause of nation-building.

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