पाँच साल पहले लोनावला के जिस खंडर विला में मौत ने अपना नंगा नाच किया था, आज वहां एक नया परिवार खुशियाँ मनाने आया है। सोलंकी परिवार एक सुकून भरी छुट्टी की तलाश में था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि कबाड़ में खरीदा गया वह 'पुराना बोर्ड गेम' सिर्फ लकड़ी का टुकड़ा नहीं, बल्कि नर्क का दरवाजा है।
जथूडा (Jathuda) जाग चुका है। और उसे नई बलि चाहिए।
नियम वही हैं—सच बोलो या हिम्मत (Dare) दिखाओ।
लेकिन इस बार दांव पर सिर्फ जान नहीं, बल्कि वर्षों से दबे गहरे पारिवारिक राज़ हैं।
जैसे-जैसे रात गहराती है और स्पिनर घूमता है, रिश्तों के नकाब उतरते हैं। एक ऐसा सच सामने आता है जो प्रथमेश, पायल, प्रेम और श्वेता की दुनिया को हमेशा के लिए तबाह कर दí