‘मैं अलग हूँ’ केवल एक कविता नहीं, यह उन सभी लोगों की आवाज़ है जो भीड़ में अलग महसूस करते हैं। क्या आपने कभी खुद को गलत समझा है? क्या कभी आपको ऐसा लगा कि आपकी सोच दूसरों से अलग है? यह किताब उसी हर इंसान के लिए है जो अपनी सच्चाई और अपने सपनों के लिए लड़ता है। इस कविता में हैं: दिल और दिमाग की लड़ाइयाँ, समाज की अपेक्षाओं के बीच आत्म-खोज, मौन में छुपी ताकत, अपने लिए खड़े होने का साहस, पढ़िए और महसूस कीजिए कि अलग होना कमजोरी नहीं, बल्कि आपकी सबसे बड़ी शक्ति है। अब अपने आप से जुड़िए और अपनी पहचान का जश्न मनाइए। 📖 Available in both Hindi & English(I am different).