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पाश्चात्य दर्शन: Western Philosophy
पाश्चात्य दर्शन के प्रति पाठकों जिज्ञासा यह होती है कि वे यह जानें कि जीवन, जगत्, ईश्वर आदि सम्बन्धी समस्याओं के विषय में पाश्चात्य दार्शनिकों ने क्या-क्या निर्णय दिये हैं। किन्तु, पाश्चात्य दर्शन पर पुस्तकें ऐतिहासिक दिग्दर्शन कराती हैं, समस्यात्मक दिग्दर्शन नहीं।
'पाश्चात्य दर्शन' पुस्तक के पन्द्रह अध्यायों में दर्शन का स्वरूप, दर्शन के क्षेत्र, दर्शन विज्ञान और धर्म के क्षेत्र में उपयोग, समानता, विभिन्नता आदि का विवेचन सविस्तार किया गया है। डॉ० ब्रह्मस्वरूप अग्रवाल ने विकास के सिद्धांत, यंत्रवाद, प्रयोजनवाद, जड़वाद, अध्यात्मवाद, आत्मा, आत्मा तथा शरीर का संबंध, ज्ञानमीमांसा, ईश्वर तथा मूल्यमीमांसा इत्यादि अध्यायों में विभिन्न दार्शनिकों के विचार प्रस्तुत किए हैं।
'पाश्चात्य दर्शन' पुस्तक के पन्द्रह अध्यायों में दर्शन का स्वरूप, दर्शन के क्षेत्र, दर्शन विज्ञान और धर्म के क्षेत्र में उपयोग, समानता, विभिन्नता आदि का विवेचन सविस्तार किया गया है। डॉ० ब्रह्मस्वरूप अग्रवाल ने विकास के सिद्धांत, यंत्रवाद, प्रयोजनवाद, जड़वाद, अध्यात्मवाद, आत्मा, आत्मा तथा शरीर का संबंध, ज्ञानमीमांसा, ईश्वर तथा मूल्यमीमांसा इत्यादि अध्यायों में विभिन्न दार्शनिकों के विचार प्रस्तुत किए हैं।
301 pages, Paperback
Published January 1, 2013
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