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त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह

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आर्यावर्त की भूमि केवल राज्यों और राजाओं की नहीं, बल्कि विचारों, आदर्शों और अदृश्य युद्धों की भूमि है।
चंद्रपुर के युवराज नीलमणि जब पहली बार न्याय और करुणा के बीच खड़े होते हैं, तो उन्हें यह आभास नहीं होता कि आने वाला समय उन्हें केवल राजा नहीं, बल्कि एक विचारधारा का प्रतीक बना देगा।
दूसरी ओर, शैलपुर की अद्भुत राजकुमारी प्रवरा, जो बुद्धि और यांत्रिकी से ऐसा अभेद्य व्यूह रचती है जिसे बल नहीं, केवल विवेक भेद सकता है—वह स्वयं भी एक ऐसे पुरुष की प्रतीक्षा में है जो शक्ति को नहीं, उसके उद्देश्य को समझ सके।
इसी बीच, अंधकार के राजकुमार क्रूरदेव, विश्वासघात, राजनीति और विनाश की योजनाओं से आर्यावर्त को जकड़ने का प्रयास करता है। उसके साथ जुड़ते हैं ऐसे पात्र जो युद्ध को केवल रक्त नहीं, बल्कि मानसिक और नैतिक पतन का साधन बना देते हैं।
लेकिन इस अंधकार में भी कुछ दीप जलते हैं—
आर्यकेतु की न्यायप्रियता,
नीलमणि की रणनीतिक करुणा,
और प्रवरा की दूरदर्शी बुद्धि—जो मिलकर एक नए आर्यावर्त की नींव रखते हैं।
यह उपन्यास केवल युद्धों की कथा नहीं है, बल्कि उस यात्रा का वर्णन है जहाँ हर निर्णय धर्म के मुखौटे के पीछे छिपे सत्य को उजागर करता है।
“त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह” पाठक को उस संसार में ले जाता है जहाँ विजय केवल राज्य की नहीं, बल्कि आत्मा की होती है—और जहाँ सबसे बड़ा युद्ध बाहरी नहीं, भीतर लड़ा जाता है।

275 pages, Kindle Edition

Published March 28, 2026

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Pradyumna Kumar Tiwari

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Displaying 1 - 3 of 3 reviews
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April 17, 2026
Suddh kintu sahaj bhasha, gahan darshan, romanchak story, amazing book
1 review
April 17, 2026
I like such historical fictions based on ethics and diplomacy.
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