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Main Mirtyu Sikhata Hoon

समाधि में साधक मरता है स्वयं, और चूंकि वह स्वयं मृत्यु में प्रवेश करता है, वह जान लेता है इस सत्य को कि मैं हं अलग, शरीर है अलग। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, मृत्यु समाप्त हो गई। और एक बार

200 pages, Paperback

First published January 1, 2007

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Diamond Books

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Displaying 1 - 3 of 3 reviews
Profile Image for Raj.
24 reviews1 follower
April 10, 2023
अगर हमें ये पता चल जाए कि अगले एक महिने में हमारी मृत्यु हो जाएगी तो हम क्या करेंगें?वो कौन सी चीज होगी या वो कौन सा काम होगा जो हम करना चाहेंगे या पाना चाहेंगे?
हम जीवन को ऐसे जीते हैं जैसे कभी मरेंगे ही नहीं।हम आए दिन अपने चारों तरफ मृत्यु को देखते हैं कभी इसकी मृत्यु तो कभी उसकी मृत्यु,लेकिन कभी भी‌ हमे अपनी मृत्यु का ख्याल नहीं आता।जो मृत्यु एक महिने बाद आने वाली है वही मृत्यु किसी को 60 वर्ष में आएगी,किसी को 70 वर्ष में तो किसी को 80 वर्ष में आएगी।
मृत्यु हमारे सामने खड़ी है अंतर सिर्फ और सिर्फ समय का है दूरी का है।जन्म के साथ ही हमारी यात्रा मृत्यु की तरफ शुरू हो जाती है हम हर एक दिन मृत्यु की तरफ ही बढ रहे हैं हम चाहे कितना भी भाग लें,दौड़ लें अंततः मृत्यु के पास ही पहुँचेगें।
ओशो कहते हैं कि मरना सिखो,इसका मतलब ये नहीं है कि आत्महत्या कर लो या छत से कूद जाओ।मरना सिखो कहने का मतलब बस इतना ही है कि तुम्हें मृत्यु का स्मरण बना रहे इसे भूलो मत एक महिने बाद नहीं तो 80 वर्ष बाद सही तुम्हारी भी मृत्यु होगी,इसे अनुभव करो।जिस व्यक्ति को ये अनुभव हो जाता है कि ये जीवन बढ नही रहा है ये धीरे-धीरे घट रहा है हम हर एक दिन मर रहे हैं और अंततः मृत्यु के पास ही पहुँचेगें ये बस एक प्रक्रिया‌ है जो इतनी धीमी है कि हमे पता नहीं चलता और जब तक हमें पता चलता है तब तक मृत्यु ठिक हमारे सामने आकर खड़ी हो जाती है वो समय और दूरी का अंतर खत्म हो जाता है और व्यक्ति बहुत घबरा जाता है क्योंकि जीवन भर उसने जो इकट्ठा किया जो कुछ भी पाया वो सब छिनता हुआ प्रतित होता है।
जिसको मृत्यु का अनुभव हो जाता है वो अपनी‌ जीवन ऊर्जा ऐसी किसी भी चीज या काम में नहीं लगाता जिसको मृत्यु छिन ले।

मृत्यु जीवन का अंत नहीं है जीवन का सार है।
अगर जीवन और मृत्यु को समझना चाहते हैं तो इस किताब को जरुर पढें।
Profile Image for Gunjan Dhir.
8 reviews
January 25, 2020
This is really such a powerful thought provoking I have ever read.

Reading Osho really could be dangerous if one doesn't read being alert.
Displaying 1 - 3 of 3 reviews