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Ashtavakra Mahageeta Bhag-II

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Osho - Missing This Book is Missing Great learning Experience

328 pages, Paperback

First published June 1, 2001

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null Osho

28 books

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Displaying 1 - 5 of 5 reviews
61 reviews
June 25, 2023
शीर्षक: ज्ञान की गहराई में एक यात्रा: "अष्टावक्र महागीता" रिव्यू (ओशो द्वारा)

परिचय:
"अष्टावक्र महागीता" एक गहरा आध्यात्मिक पाठ है जो स्व-प्रकाशन और मुक्ति के मार्ग को अन्वेषण करता है। इस पुस्तक के लेखक मशहूर आध्यात्मिक गुरु ओशो हैं, जो प्राचीन भारतीय प्रशासनिक पाठ "अष्टावक्र गीता" पर आधारित विचारधारा का वर्णन करते हैं। इस विस्तृत समीक्षा में हम ओशो के व्याख्यान की मूल बातचीत, दार्शनिक दृष्टिकोण, साहित्यिक शैली, और आध्यात्मिक विकास और समझ की तरफ ध्यान देंगे, जो आध्यात्मिक विकास और समझ की तलाश में रहने वाले पाठकों के लिए महत्वपूर्ण है।

अवलोकन:
ओशो की "अष्टावक्र महागीता" अष्टावक्र गीता के उद्घोषणा की नई दृष्टिकोण प्रदान करती है, जो ऋषि अष्टावक्र और राजा जनक के बीच एक प्रसिद्ध संवाद पर आधारित है। पुस्तक में ओशो के व्याख्यानों की संख्या है, जहां उन्होंने प्राचीन पाठ में छ

िपे गहरे ज्ञान की खोज की है। ओशो का व्याख्यान उनके विशेष दृष्टिकोण को प्रतिष्ठित करता है, जो आध्यात्मिकता, मनोविज्ञान, और गुप्तविज्ञान को मिश्रित करके पाठकों को स्व-ज्ञान और मुक्ति की ओर प्रेरित करने के लिए है।

दार्शनिक दृष्टिकोण:
"अष्टावक्र महागीता" में ओशो का मुख्य उद्देश्य पाठकों को उनकी शरीरिक मनोवृत्ति की सीमाओं को पार करने और पवित्र चेतना की अवस्था का अनुभव करने में मदद करना है। अष्टावक्र गीता के माध्यम से ओशो अमूल्य दर्शनिक सिद्धांतों को खोजते हैं जैसे अद्वैत, आत्म-स्वीकृति, अलगाव, और अहंकार का विघटन। उन्होंने वर्तमान क्षण को स्वीकार करने और पिछली संकल्पनाओं, सामाजिक उम्मीदों, और भयाधिन विचारों के बोझ को छोड़ने की महत्ता को जोर दिया है।

पुस्तक इस धारणा को हाइलाइट करती है कि मुक्ति शरीर, मन, और भावनाओं से परे अस्तित्व को पहचानने में होती है। ओशो ने आत्म-ज्ञान की खोज में प्र

श्न पूछने के लिए पाठकों को प्रेरित किया है, जिससे अंततः यह ज्ञान हासिल होता है कि सच्चा आत्मा शरीर, मन, और भावनाओं से परे है। उनके चेतनता की प्रकृति और द्वैत की मोहिनी प्रकृति पर उनके गहरे दर्शन के लिए यह पुस्तक एक गहरी आधारशिला प्रदान करती है।

साहित्यिक शैली:
"अष्टावक्र महागीता" में ओशो की लेखन शैली सरल और गहरी है। उन्होंने प्राचीन ज्ञान को समकलित भाषा में तैयार किया है, जिससे सभी पाठकों को समझने में सुगमता होती है। ओशो के व्याख्यान रोचक और सोच-विचार को उत्तेजित करने वाले हैं, अक्सर उपन्यासों, कहानियों, और हास्यास्पद टिप्पणियों के साथ प्रस्तुत होते हैं जो विषय की गंभीरता को हल्का करते हैं। उनकी क्षमता कि वे जटिल आध्यात्मिक विचारों को सुगमता से समझने वाले पाठकों के लिए उपलब्ध करा सकते हैं, यह पुस्तक की मजबूतियों में से एक है।

इसके अलावा, "अष्टावक्र महागीता" में ओशो की गहरी दर्शनिक दृष्टि क

ेवल बौद्धिक समझ से परे है। उन्होंने पाठकों को ध्यान धारणा, सामयिकता, और आत्म-निरीक्षण की अभ्यास विधियों के साथ प्रेरित किया है। इस अनुभवात्मक पहलू ने पुस्तक को गहराई दिया है, जिससे पाठक सीधे शिक्षाओं को अनुभव करके और अपनी आत्म-परिवर्तनी यात्रा पर जाकर अपने आप को जान सकते हैं।

प्रभाव:
"अष्टावक्र महागीता" पाठकों के आध्यात्मिक विकास और स्व-ज्ञान की तलाश में गहरा प्रभाव डाल सकती है। ओशो का दयालु और अगुण्ड दृष्टिकोण उन व्यक्तियों के लिए रास्ता मेंढ़ने की क्षमता रखता है जो विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं से संबंध रखते हैं। पुस्तक की उच्चता उसमें स्वीकार्यता, आंतरिक स्वतंत्रता, और अहंकार के नष्ट होने की महत्वपूर्णता को प्रकट कर सकती है।

पुस्तक की एक मुख्य सामर्थ्य है कि यह सामान्य विश्वासों को चुनौती देने और सामाजिक संरचनाओं के अनुयायी विचारधाराओं को प्रश्नित करने की क्षमता है। ओशो की शिक

्षाओं के माध्यम से, पाठकों को उनकी अंतर्मुखी संवेदना को जागृत करके वास्तविकता की ओर प्रेरित किया जा सकता है।

संक्षेप में कहें तो, "अष्टावक्र महागीता" ओशो के आध्यात्मिक विचारों का एक महत्वपूर्ण संकलन है। यह पुस्तक आंतरिक खोज के लिए एक मार्गदर्शक है और पाठकों को आत्म-समझ, स्वानुभव, और आध्यात्मिक स्वतंत्रता की ओर प्रेरित करती है। यह उन लोगों के लिए अनिवार्य है जो आध्यात्मिकता और स्व-अन्वेषण में रुचि रखते हैं।
This entire review has been hidden because of spoilers.
Profile Image for Akhil Jain.
687 reviews51 followers
May 5, 2023
Most is a repeat of other talks..
Listened to the whole series on google podcast
My fav quotes:

https://www.osho.com/hi/osho-hindi-on...

मुसलसल खामोशी की ये पर्दापोशी,
अबस है कि अब राजदां हो गये हम।
सुकूं खो दिया हमने तेरे जुनूं में,
तेरे गम में शोला-बजां हो गये हम।
हुए इस तरह खम जमानों के हाथों,
कभी तीर थे, अब कमां हो गये हम।
न रहबर न कोई रफीके-सफर है,
ये किस रास्ते पर रवां हो गये हम।
हमें बेखुदी में बड़ा लुत्फ आया,
कि गुम हो के मंजिलनिशां हो गये हम।

यह मंजिल ऐसी है कि खोकर मिलती है। तुम जब तक हो, तब तक नहीं मिलेगी; तुम खोये कि मिलेगी।

हमें बेखुदी में बड़ा लुत्फ आया,

जहां तुम नहीं, जहां तुम्हारा अहंकार गया, जहां बेखुदी आई...।

हमें बेखुदी में बड़ा लुत्फ आया,
कि गुम हो के मंजिलनिशां हो गये हम।

कि खो कर और पहुंच गये! यह रास्ता मिटने का रास्ता है।

तो अगर तुम्हें लगता है, ‘मेरी समर्पण की पात्रता कहां?’ तो मिटना शुरू हो गये, बेखुदी आने लगी। अगर तुम्हें लगता है कि ‘मेरी श्रद्धा कहां?’ तो बेखुदी आने लगी, तुम मिटने लगे।

संन्यास यही है कि तुम मिट जाओ, ताकि परमात्मा हो सके।

न रहबर, न कोई रफीके-सफर है!

यह तो बड़ी अकेले की यात्रा है।

न रहबर, न कोई रफीके-सफर है!

न कोई साथी है, न कोई मार्गदर्शक है। अंततः तो गुरु भी छूट जाता है, क्योंकि वहां इतनी जगह भी कहां! प्रेम-गली अति सांकरी, तामें दो न समायें! वहां इतनी जगह कहां कि तीन बन सकें! दो भी नहीं बनते। तो शिष्य हो, गुरु हो, परमात्मा हो, तब तो तीन हो गए! वहां तो दो भी नहीं बनते। तो वहां गुरु भी छूट जाता है। वहां तुम भी छूट जाते; वहां परमात्मा ही बचता है।

न रहबर, न कोई रफीके-सफर है
ये किस रास्ते पर रवां हो गये हम।
Profile Image for Jaiprakash.
236 reviews4 followers
May 4, 2026
A continuation from the previous Ashtavakra on how to know that you are. There is nothing to be found, for nothing was lost.
A profound book on how we think and look for happiness. Happiness is the default state but in the search for it, we loose it.

One of the most wrongly understood author, a classic case of judging a book by its cover. What Osho says is so profound that the society wants you to judge him by the few statements when taken out of context can create a wrong impression.
The books have profound meaning on life and should be lived not just read.
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