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Ashtavakra Mahageeta Bhag- VIII Sukh Swabhav (अष्टावक्र महागीता भाग- 8 सुख स्वभाव)

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अष्टावक्र के ये सूत्र अंतर्यात्रा के बड़े गहरे पड़ाव-स्थल हैं। एक-एक सूत्र को खूब ध्यान से समझना।
ये बातें ऐसी नहीं कि तुम बस सुन लो, कि बस ऐसे ही सुन लो। ये बातें ऐसी हैं कि सुनोगे तो ही सुना। ये बातें ऐसी हैं कि ध्यान में उतरेंगी, अकेले कान में नहीं, तो ही पहुंचेंगी तुम तक। तो बहुत मौन से, बहुत ध्यान से...।
इन बातों में कुछ मनोरंजन नहीं है। ये बातें उन्हीं के लिए हैं जो जान गए कि मनोरंजन मूढ़ता है। ये बातें उनके लिए हैं जो प्रौढ़ हो गए हैं। जिनका बचपना गया; अब जो घर नहीं बनाते हैं; अब जो खेल-खिलौना नहीं सजाते; अब जो गड्डा-गुड्डियों का विवाह नहीं रचाते; अब जिन्हें एक बात की जाग आ गई है कि कुछ करना है-कुछ ऐसा आत्यन्तिक कि अपने से परिचित हो जाएं। अपने से परिचय हो तो चिंता मिटे। अपने से परिचय हो तो दूसरा किनारा मिले। अपने से परिचय हो तो सबसे परिचय होने का द्वार खुल जाए।
हरि ओम् तत् सत्

320 pages, Paperback

First published January 1, 2008

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null Osho

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June 25, 2023
शीर्षक: ज्ञान की गहराई में एक यात्रा: "अष्टावक्र महागीता" रिव्यू (ओशो द्वारा)

परिचय:
"अष्टावक्र महागीता" एक गहरा आध्यात्मिक पाठ है जो स्व-प्रकाशन और मुक्ति के मार्ग को अन्वेषण करता है। इस पुस्तक के लेखक मशहूर आध्यात्मिक गुरु ओशो हैं, जो प्राचीन भारतीय प्रशासनिक पाठ "अष्टावक्र गीता" पर आधारित विचारधारा का वर्णन करते हैं। इस विस्तृत समीक्षा में हम ओशो के व्याख्यान की मूल बातचीत, दार्शनिक दृष्टिकोण, साहित्यिक शैली, और आध्यात्मिक विकास और समझ की तरफ ध्यान देंगे, जो आध्यात्मिक विकास और समझ की तलाश में रहने वाले पाठकों के लिए महत्वपूर्ण है।

अवलोकन:
ओशो की "अष्टावक्र महागीता" अष्टावक्र गीता के उद्घोषणा की नई दृष्टिकोण प्रदान करती है, जो ऋषि अष्टावक्र और राजा जनक के बीच एक प्रसिद्ध संवाद पर आधारित है। पुस्तक में ओशो के व्याख्यानों की संख्या है, जहां उन्होंने प्राचीन पाठ में छ

िपे गहरे ज्ञान की खोज की है। ओशो का व्याख्यान उनके विशेष दृष्टिकोण को प्रतिष्ठित करता है, जो आध्यात्मिकता, मनोविज्ञान, और गुप्तविज्ञान को मिश्रित करके पाठकों को स्व-ज्ञान और मुक्ति की ओर प्रेरित करने के लिए है।

दार्शनिक दृष्टिकोण:
"अष्टावक्र महागीता" में ओशो का मुख्य उद्देश्य पाठकों को उनकी शरीरिक मनोवृत्ति की सीमाओं को पार करने और पवित्र चेतना की अवस्था का अनुभव करने में मदद करना है। अष्टावक्र गीता के माध्यम से ओशो अमूल्य दर्शनिक सिद्धांतों को खोजते हैं जैसे अद्वैत, आत्म-स्वीकृति, अलगाव, और अहंकार का विघटन। उन्होंने वर्तमान क्षण को स्वीकार करने और पिछली संकल्पनाओं, सामाजिक उम्मीदों, और भयाधिन विचारों के बोझ को छोड़ने की महत्ता को जोर दिया है।

पुस्तक इस धारणा को हाइलाइट करती है कि मुक्ति शरीर, मन, और भावनाओं से परे अस्तित्व को पहचानने में होती है। ओशो ने आत्म-ज्ञान की खोज में प्र

श्न पूछने के लिए पाठकों को प्रेरित किया है, जिससे अंततः यह ज्ञान हासिल होता है कि सच्चा आत्मा शरीर, मन, और भावनाओं से परे है। उनके चेतनता की प्रकृति और द्वैत की मोहिनी प्रकृति पर उनके गहरे दर्शन के लिए यह पुस्तक एक गहरी आधारशिला प्रदान करती है।

साहित्यिक शैली:
"अष्टावक्र महागीता" में ओशो की लेखन शैली सरल और गहरी है। उन्होंने प्राचीन ज्ञान को समकलित भाषा में तैयार किया है, जिससे सभी पाठकों को समझने में सुगमता होती है। ओशो के व्याख्यान रोचक और सोच-विचार को उत्तेजित करने वाले हैं, अक्सर उपन्यासों, कहानियों, और हास्यास्पद टिप्पणियों के साथ प्रस्तुत होते हैं जो विषय की गंभीरता को हल्का करते हैं। उनकी क्षमता कि वे जटिल आध्यात्मिक विचारों को सुगमता से समझने वाले पाठकों के लिए उपलब्ध करा सकते हैं, यह पुस्तक की मजबूतियों में से एक है।

इसके अलावा, "अष्टावक्र महागीता" में ओशो की गहरी दर्शनिक दृष्टि क

ेवल बौद्धिक समझ से परे है। उन्होंने पाठकों को ध्यान धारणा, सामयिकता, और आत्म-निरीक्षण की अभ्यास विधियों के साथ प्रेरित किया है। इस अनुभवात्मक पहलू ने पुस्तक को गहराई दिया है, जिससे पाठक सीधे शिक्षाओं को अनुभव करके और अपनी आत्म-परिवर्तनी यात्रा पर जाकर अपने आप को जान सकते हैं।

प्रभाव:
"अष्टावक्र महागीता" पाठकों के आध्यात्मिक विकास और स्व-ज्ञान की तलाश में गहरा प्रभाव डाल सकती है। ओशो का दयालु और अगुण्ड दृष्टिकोण उन व्यक्तियों के लिए रास्ता मेंढ़ने की क्षमता रखता है जो विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं से संबंध रखते हैं। पुस्तक की उच्चता उसमें स्वीकार्यता, आंतरिक स्वतंत्रता, और अहंकार के नष्ट होने की महत्वपूर्णता को प्रकट कर सकती है।

पुस्तक की एक मुख्य सामर्थ्य है कि यह सामान्य विश्वासों को चुनौती देने और सामाजिक संरचनाओं के अनुयायी विचारधाराओं को प्रश्नित करने की क्षमता है। ओशो की शिक

्षाओं के माध्यम से, पाठकों को उनकी अंतर्मुखी संवेदना को जागृत करके वास्तविकता की ओर प्रेरित किया जा सकता है।

संक्षेप में कहें तो, "अष्टावक्र महागीता" ओशो के आध्यात्मिक विचारों का एक महत्वपूर्ण संकलन है। यह पुस्तक आंतरिक खोज के लिए एक मार्गदर्शक है और पाठकों को आत्म-समझ, स्वानुभव, और आध्यात्मिक स्वतंत्रता की ओर प्रेरित करती है। यह उन लोगों के लिए अनिवार्य है जो आध्यात्मिकता और स्व-अन्वेषण में रुचि रखते हैं।
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