ये मूलतः 10 भागों में लिखा गया एक आकाशवाणी के लिए लिखा गया नाटक है जिसे उपन्यास का रूप दिया गया है, और ये साफ़ दिखता है किरदारों से संवाद और कहानी की संरचना से। संभवतः ऑडियोबुक के माध्यम से ये रचना बेहतर लगे। गौरतलब है कि लेखक अपने उपसर्ग में 1960 के शुरुआती सालों में आकाशवाणी में होने वाली सेंसरशिप का ज़िक्र करते हैं।