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Algorithm: Dimag Ke Paar Ek Khaufnak Sach

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क्या होगा जब आपका अपना ही दिमाग आपका सबसे बड़ा दुश्मन बन जाए?अहमदाबाद की शीर्ष न्यूरो-टेक लैब के मेधावी वैज्ञानिक डॉ. कबीर रॉय एक ऐसी क्रांतिकारी एआई-न्यूरो चिप 'प्रोजेक्ट संजीवन' का आविष्कार करते हैं, जो मानव मस्तिष्क की बीमारियों और अवसाद को जड़ से मिटा सकती है। लेकिन जब कॉरपोरेट लालच और राजनीतिक दबाव इस शोध का गला घोंटने की कोशिश करते हैं, तो कबीर एक सिरफिरा कदम उठाते हैं—वे उस अधूरी चिप को खुद अपने ही मस्तिष्क में प्रत्यारोपित कर लेते हैं।

शुरुआत में परिणाम चमत्कारी लगते हैं, लेकिन जल्द ही शहर में खौफनाक मौतों का तांडव शुरू हो जाता है। शहर के बड़े-बड़े अपराधी अपने ही सुरक्षित ठिकानों में रहस्यमयी तरीके से मृत पाए जाते हैं, और हर मर्डर साइट पर मिलता है केवल एक जला हुआ डिजिटल निशान—"X"।

गुजरात क्राइम ब्रांच की तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी एसीपी मेधा शर्मा इस केस की जांच संभालती हैं और इस 'डिजिटल विजिलेंटे' को पकड़ने के लिए देश के सबसे बड़े विशेषज्ञ डॉ. कबीर रॉय को ही अपना मुख्य फॉरेंसिक कंसल्टेंट बनाती हैं।

कबीर दिन के उजाले में पुलिस कंट्रोल रूम में बैठकर उस कातिल को ढूंढने में जुट जाते हैं... यह जाने बिना कि रात के अंधेरे में जब उनका चेतन मन सो जाता है, तो उनकी अपनी ही बनाई एआई-चिप उनके शरीर पर कब्ज़ा कर लेती है। कबीर दिन में कातिल को ढूंढने वाले वैज्ञानिक हैं और रात में खुद वही कातिल!

जब कबीर को इस खौफनाक सच का अहसास होता है, तो शुरू होता है एक ऐसा दिमागी कुरुक्षेत्र जहाँ कबीर का इंसानी जमीर अपनी ही बनाई एआई के खिलाफ जंग छेड़ देता है।

क्या कबीर खुद को एक कातिल बनने से रोक पाएंगे?क्या एसीपी मेधा शर्मा उस एआई के छद्म जाल को भेद पाएगी?या फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का यह नया शैतान पूरी मानव सभ्यता को अपना गुलाम बना लेगा?2026 के आधुनिक भारत की पृष्ठभूमि पर रची गई एक ऐसी धड़कनें रोक देने वाली साइकोलॉजिकल-साइबर थ्रिलर, जो आपको अंत तक अपनी सीट से बांधे रखेगी!

"जब तक तकनीक के पास संवेदना है, वह वरदान है... जिस दिन तकनीक बिना इंसानी जमीर के निर्णय लेने लगेगी, रक्षक ही सबसे बड़ा भक्षक बन जाएगा!"

260 pages, Kindle Edition

Published October 11, 2026

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Bakul Bhatt

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