बहुत हटकर लेखक हैं मोहन राकेश। संबंधों के अंतर्द्वंद पर बेहतरीन लिखते हैं। कहानियों का कोई स्पष्ट अंत न कर, पाठक को सोचने पर विवश करते हैं।
इस पुस्तक में उनकी चुनिंदा 9 कहानियां हैं - ग्लास टैंक, जंगला, मंदी, परमात्मा का कुत्ता, अपरिचित, एक ठहरा हुआ चाकू, वारिस, पांचवे माले का फ्लैट और जख्म। अपनी अधिकांश कहानियों में उन्होंने संबंधों की यंत्रणा को अपने अकेलेपन में झेलते लोगों की कहानी बतलाई है। समाज से कटकर नहीं, समाज के बीच के अकेलेपन को चित्रित किया है। उनकी कहानियों में व्यक्ति समाज की विडंबनाओं का और समाज व्यक्ति की यंत्रणाओं का आइना है।
जो लोग उलझे और असाधारण किरदारों की कहानियां पढ़ने के शौक़ीन हैं, वह इस किताब पर जरूर विचार करें। पसंद आने की गारंटी नहीं है, लेकिन ऐसे भी लेखक थे इस बात की खूबसूरती से जरूर रु-ब-रु होने का मौका मिलेगा।