मंटो का अपना अंदाज़ है। मंटो के अपने स्वरअपने तेवर हैं। कहानी कहने अथवा बुनने का जो सलीका मंटो की कहानियों में नज़र आता है,वो दुर्लभ है। मंटो आरंभ से ही अपने बड़े कथाकार होने का ऐलान करता आये थे और वास्तव में जिस समय कहानियाँ,रिवयती अंदाज़ में लिखी जा रही थीं,मंटो ने उस दौर में भी कहानी को अपने हिसाब से चलना सिखाया। उन्होने तजुर्बे भी किए। अपने समय के समकालीन कथाकारों में वो बेवक्त रिवायती भी थे और आधुनिक भी। वो “ काली शलवार” और “खोल दो’ लिख रहे थे,वहीं ‘कीमा की बजाय बोटियाँ’ जैसी कहानी में उनके भीतर के आधुनिक कथाकार को देखा जा सकता है।
Saadat Hasan Manto (Urdu: سعادت حسن منٹو, Hindi: सआदत हसन मंटो), the most widely read and the most controversial short-story writer in Urdu, was born on 11 May 1912 at Sambrala in Punjab's Ludhiana District. In a writing career spanning over two decades he produced twenty-two collections of short stories, one novel, five collections of radio plays, three collections of essays, two collections of reminiscences and many scripts for films. He was tried for obscenity half a dozen times, thrice before and thrice after independence. Not always was he acquitted. Some of Manto's greatest work was produced in the last seven years of his life, a time of great financial and emotional hardship for him. He died a few months short of his forty-third birthday, in January 1955, in Lahore.
मंटो में अपनी जिंदगी में कई कहानियां लिखी, उन कहानियों में से कुछ चुनिंदा कहानियों का ये संकलन है| पुस्तक कि टाइटल कहानी से समीक्षा कि शुरुआत करते है, टेटवाल का कुत्ता की कहानी दो देश कि सीमाओ पर तेनात सेनिकों के बिच कहानी हे जिसने दोनों तरफ के सेनिक कुत्ते पर लिखते कि ये “पाकिस्तानी कुत्ता है या ये हिन्दुस्तानी कुत्ता है” और आखिर में उस कुत्ते का हालत वेसी ही होती है जो दो सीमाओ के बिच खड़े इंसान कि होती है | मंटो कि कहानिया सामाजिक और उसके समाज ऊपर आधारित होती है | कहानिया इंसानी फीलिंग्स को भरपूर दर्शाती है| मंटो कि पुस्तकों के चरक्टोर काफी सरल हो कर भी सरल नही है, पुस्तक कि पहली कहानी में ही भरपूर आनंद और किस तरह एक अच खासा व्यक्ति बर्बाद हो जाता है उसके ऊपर आधारित है| भाषा सरल है और लाजबाब है| मेरी सबसे पसंदीदा कहानी लाइसेंस है अब में इसी के बारे में बात करने जा रहा हु| कहानी एक रिक्शा या त्तंगा चलने वाले कि है जो एक लड़की से विवाह करता है क्युकी वो रिक्शा वाला काफी मशहुर था इसलिए वो हर किसीको को नही बिठाता था इस वजह से लोग उससे चिद ते थे, कुछ लोगो उसके खिलाफ षड्यंत्र रचा और उससे जेल में डाल दिया गया और किसी बीमारी कि वजह से उसकी मर्त्यु हो गयी, लड़की ने रिक्शा चलाना शुरू कर दिए लेकिन लोगो उसका लाइसेंस कैंसिल करवा दिया जब उसने इसकी वजह पूछी तो अफसरों ने कहा कि वो एक औरत है और रिक्शा चलने का कोई हक़ नही, दुसरे दिन उससे उस चीज़ का लाइसेंस मिल गया जो हमारे समाज में एक इज़त्तदार काम नही है| आगे आप खुद पुस्तक पढ़िए और जानिए|