A Hindi novel based in age old debate on concept of God.
पुस्तक के कुछ अंश: (भूमिका) परमात्मा के अस्तित्व के विषय में आदि काल से चलते आ रहे विवाद के आधार पर इस उपन्यास की रचना की गयी है। परमात्मा के अस्तित्व को मानने वालों में सदा यह मतभेद रहा है कि परमात्मा ही एक है अथवा परमात्मा भी एक है ? इस अनिर्णयात्मक प्रश्न को लेकर आस्तिकों ने अपने ग्रन्थों में बहुत लम्बे-चौड़े आख्यान लिखे हैं। उन आख्यानों पर टीकाएँ और फिर टीकाओं की टीकाएँ भी की हैं।
इनको आधार बनाकर ‘विश्वास’ उपन्यास को लिखने का यत्न किया है। परमात्मा पर विश्वास, श्रद्धा अथवा निष्ठा का एक व्यावहारिक रूप प्रस्तुत करने में इस कहानी का ताना-बाना बनाया गया है। आस्तिकों के इस विवाद में नास्तिकों की झलक का लाना आवश्यक हो गया था। दोनों विचार अर्थात् परमात्मा ही है तथा परमात्मा भी है का घात-प्रतिघात नास्तिकों पर कैसा रहता है, इसकी विवेचना करने का यत्न किया है। कुछ विद्वानों का मत है कि नास्तिक्य को काटने के लिए ही अद्वैतवाद (परमात्मा ही है) का जन्म हुआ था। इस पुस्तक में इससे विपरीत मत की सम्भावना पर प्रकाश डालने का यत्न किया है। शेष तो उपन्यास ही है। पात्र, स्थान इत्यादि काल्पनिक हैं।
लाहौर (अब पाकिस्तान) में जन्मे श्री गुरुदत्त हिन्दी साहित्य के एक देदीप्यमान नक्षत्र थे। वह उपन्यास-जगत् के बेताज बादशाह थे। अपनी अनूठी साधना के बल पर उन्होंने लगभग दो सौ से अधिक उपन्यासों की रचना की और भारतीय संस्कृति का सरल एवं बोधगम्य भाषा में विवेचन किया। साहित्य के माध्यम से वेद-ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का उनका प्रयास निस्सन्देह सराहनीय रहा है।
श्री गुरुदत्त के साहित्य को पढ़कर भारत की कोटि-कोटि जनता ने सम्मान का जीवन जीना सीखा है।
उनके सभी उपन्यासों के कथानक अत्यन्त रोचक, भाषा, अत्यन्त सरल और उद्देश्य केवल मनोरंजन ही नहीं, अपितु जन-शिक्षा भी है। राष्ट्रसंघ के साहित्य-संस्कृति संगठन ‘यूनेस्को’ के अनुसार श्री गुरुदत्त हिन्दी भाषा के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले लेखक थे।
उपन्यास : गुण्ठन, चंचरीक, आशा निराशा, सम्भवामि युगे युगे-भाग 1, सम्भवामि युगे युगे भाग 2, अवतरण, कामना, अपने पराये, आकाश-पाताल, अनदेखे बन्धन, घर की बात, आवरण, जीवन ज्वार, महाकाल, यह संसार, वाम मार्ग, दो भद्र पुरुष, बनवासी, प्रारब्ध और पुरुषार्थ, विश्वास, माया जाल, पड़ोसी, नास्तिक, प्रगतिशील, सभ्यता की ओर, मेघ वाहन, भगवान भरोसे, ममता, लुढ़कते पत्थर, लालसा, दिग्विजय, धर्मवीर हकीकत राय, दासता के नये रूप, स्वराज्य दान, नगर परिमोहन, भूल, स्वाधीनता के पथ पर, विश्वासघात, देश की हत्या, पत्रलता, भारतवर्ष का संक्षिप्त इतिहास, पथिक, प्रवंचना, पाणिग्रहण, परित्राणाय साधूनाम, गृह-संसद, सब एक रंग, विक्रमादित्य साहसांक, गंगा की धारा, सदा वत्सले मातृभूमे, पंकज, सागर-तरंग, भाव और भावना, दो लहरों की टक्कर-भाग 1, दो लहरों की टक्कर-भाग 2, सफलता के चरण, मैं हिन्दू हूँ, मैं न मानूँ, स्व-अस्तित्व की रक्षा, प्रतिशोध, भाग्य का सम्बल, बन्धन शादी का, वीर पूजा, वर्तमान दुर्व्यवस्था का समाधान हिन्दू राष्ट्र, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की अन्तिम यात्रा, सुमति, युद्ध और शान्ति-भाग 1, युद्ध और शान्ति-भाग 2, जमाना बदल गया-भाग 1, जमाना बदल गया-भाग 2, जमाना बदल गया-भाग 3, जमाना बदल गया भाग-4, खण्डहर बोल रहे हैं-भाग 1, खण्डहर बोल रहे हैं-भाग 2, खण्डहर बोल रहे हैं-भाग 3, प्रेयसी, परम्परा, धरती और धन, हिन्दुत्व की यात्रा, अस्ताचल की ओर भाग-1, अस्ताचल की ओर-भाग 2, अस्ताचल की ओर-भाग 3, भाग्य चक्र, द्वितीय विश्वयुद्ध, भैरवी चक्र, भारत में राष्ट्र, बुद्धि बनाम बहुमत, धर्म तथा समाजवाद, विकार, अग्नि परीक्षा, जगत की रचना, अमृत मन्थन, जिन्दगी, श्रीराम।