पुस्तक की भाषा सरल-सुलभ है, मैं २-३ घंटे में सहजता से इसे पूरा पढ़ पाया।
पुस्तक के वे अंश जहाँ कैविन पीटरसन अपने बारे में नहीं वरन खेल के बारे में बात करते हैं, वे काफ़ी रोचक हैं। उनका तकनीकी आँकलन और खेल के विभिन्न पहलुओं पर विचार बहुत ज्ञानवर्धक हैं। वे फ़ॉर्म और ज़ोन में अंतर दर्शाते हैं और यह भी स्पष्ट करते हैं कि परवर्ती अधिक महत्वपूर्ण क्यों है। गेंदबाज़ों के साथ उनके संघर्ष विशेषकर मिशेल जॉनसन, शेन वार्न, मुरलीधरन, ब्रेट ली का विवरण काफी रोचक है। वे मैच के लिए कैसे तैयारी करते हैं और खेल के मानसिक पहलू के बारे में उनके विचार बहुत दिलचस्प हैं।
पुस्तक में असंख्य बार वे "मैं ऐसा हूँ, मैं वैसा हूँ, मैं दूसरों से बेहतर हूँ और क्यों हूँ" - यही सब घसीटते रहते हैं जो सच में काफी "Cringe" है। इस बात में कोई संदेह नहीं कि कैविन पीटरसन अच्छे खिलाड़ी थे पर उन्हें पढ़ कर "Second Hand Embarrassment" होता है।
पुस्तक के वे अंश पढ़ना बड़ा कठिन लगता है।
बाकी पुस्तक में ऐसा कुछ नया नहीं है - उनके खेल के बारे में विचार हम कमेंट्री में सुनते रहते हैं।
नोट - नेथन लायन के लिए वे लिखते हैं "In front of me on that day in Perth was an average off-spinner I'd already hit for six.." :-)