यह पूरी किताब 1984 के लेखों का संकलन है,और उस समय की राजनीति के ही इर्दगिर्द लिखे गये हैं,कुछ लेख सामाजिक समस्याओं पर भी इमानदारी से कटाक्ष करतें हैं मगर उनकी संख्या बहुत कम है,99% सभी लेखों मे सारी समस्या की जड़ चौधरी चरण,स्वामी ,अटल बिहारी ,अकालियों, वामपंथियों,को बनाया गया है,और कांग्रेस की कमियों पर परसाई जी पसर गये हैं जबकि सरकार में कांग्रेस है,हर समस्या और कमी के लिए सभी लेखों में इन्हीं व्यक्तियों को दोषी ठहृराना बोर कर दिया और जमा नहीं, वहीं परसाई जी की सदाचार की ताबीज ने हंसाया और चिंतन को प्रेरित भी किया, हो सकता मैं 1984 और 2017 की तुलना कर रहा हूं,क्योंकि तब भाजपा की छवि सांप्रदायिक रही हो लेकिन,सरकार तो कांग्रेस की थी न