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Hum Na Marab
Novels
344 pages, Paperback
Published January 1, 2022
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October 25, 2022
हम न मरब मौत और मौत के बाद से तेरहवी तक के दिनों की गंभीरता पर लिखा हुआ एक गजब का व्यंग्य है। कहानी एक बुन्देलखंडी गाँव लुगासी की है, जिसे वहाँ का लहजा और भाषा दर्शाती है। हमारी कहानी के नायक और मेरी पसंदीदा पात्र ‘बब्बा’ की मौत हो चुकी है और ये कहानी उनकी मौत के बाद के घटनाक्रम की है। कहानी के अन्य पात्र है, रज़्जन, नन्ना, गप्पु, गोपी, महंत जी इत्यादि। मौत विषय है तो लेखक ‘फिलासफी’ भी स्वाद अनुसार डालता रहता है और आपको उस फिलासफी से झटक कर वापस लुगासी गाँव में डाल देता है। आपको जात-पात, ऊंच-नीच, घोर कलजुग, औरत जात, जैसे मसलों पर चोट भी करता है। कहानी के कई प्रसंग या कहिए ‘वन लाइनर’ ऐसे है जो आपको ठहाका मार कर हंसने पर विवश कर देते है। कृष्ण और अर्जुन संवाद जैसा गप्पु और जीजा जी का संवाद है जो गप्पु को बंटवारा क्या है और क्यूँ सांसारिक जीवन के लिए जरूरी है जैसे गहन विषय पर उपदेश देते है। स्पष्ट और साफ शब्दों में कहे तो अगर आप मौत जैसे विषय पर व्यंग्य बिना भावनाएं आहत हुए, जोकि अमूमन हो जाती है, पढ़ सकते है तो पढ़ डालिए इसे। इतना वायदा है की आप निराश नहीं होंगे।
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