कोलकाता के एक गरीब क्लर्क के घर में जन्मे निमाई भट्टाचार्य का बचपन अत्यंत संघर्षपूर्ण परिस्थितियों के बीच बीता। कॉलेज जीवन के दौरान ही उनके पत्रकारिता जीवन की भी शुरुआत हुई। पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ने पर उनकी साहित्यिक प्रवृति जागृत हो उठी। जीवन के विभिन्न पहलुओं से रूबरू होते हुए उन्होंने नारी जीवन को करीब से महसूस किया। यही कारण है। कि उनके लेखन में नारी के चरित्र व समाज में उसके स्थान का मुख्य रूप से चित्रण हुआ है। श्री निमाई भट्टाचार्य आज बंगला के प्रतिष्ठित व यशस्वी उपन्यासकार हैं। उनके प्रथम उपन्यास "राजधानीर पथ्ये" का मखबंध स्वयं भूतपूर्व राष्ट्रपति "डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन" ने लिखा था। उनकी मूल बांग्ला रचनाओं 'राग असावरी', 'देवर भाभी', 'अठारह वर्ष की लड़की', 'सोनागाछी की चम्पा', 'अवैध रिश्ते' का हिन्दी अनुवाद प्रकाशित हो चुका है। इसी श्रृंखला की नई कड़ी है "एक नर्स की डायरी"। पढ़िए, एक नर्स के जीवन के अनुभवों की गाथा जी अपनी कर्त्तव्य भावना के समक्ष अपना सब कुछ होम कर देती है। लगातार नाइट ड्यूटी के बावजूद भी वह अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करती है। परंतु फिर भी वह अपने निजी जीवन को अपने व्यावसायिक जीवन पर हावी नहीं होने देती।
বাংলা সাহিত্যের এই খ্যাতিমান ঔপন্যাসিক নিমাই ভট্টাচার্য ১৯৩১ সালের ১০ এপ্রিল কলকাতায় জন্মগ্রহণ করেন। তাঁর আদি নিবাস তৎকালীন যশোর জেলার মাগুরা মহকুমার (বর্তমান জেলা) শালিখা থানার অন্তর্গত শরশুনা গ্রামে। তাঁর পিতার নাম সুরেন্দ্রনাথ ভট্টাচার্য।
নিমাই ভট্টাচার্য বাংলাদেশের বগুড়া জেলার কালীতলার বিশিষ্ট ব্যবসায়ীর কন্যা দীপ্তি ভট্টাচার্যকে বিবাহ করেন। কলকাতার টালিগঞ্জের শাশমল রোডের বাসায় বসবাস করতেন তিনি।
জীবনের টানে, জীবিকার গরজে কক্ষচ্যুত উল্কার মত এশিয়া-আফ্রিকা ইউরোপ- আমেরিকা, গ্রাম-গঞ্জ, শহর -নগর ঘুরে বেড়িয়েছেন নিমাই ভট্টাচার্য। যারা তাঁকে ভালবেসে কাছে নিয়েছেন, তাঁদের সংগে লেনদেন হয়েছে হাসি-কান্না, স্নেহ-প্রেম ভালবাসার। হঠাৎ করেই একদিন তাঁদের কথায় লিখতে শুরু করলেন গল্প-উপন্যাস।
নিমাই ভট্টাচার্যের সাহিত্য চিন্তা তাঁর জীবনচর্চার একান্ত অনুগামী হয়ে দেখা দিয়েছে। ১৯৬৩ সালে তাঁর লেখা একটি উপন্যাস কলকাতার সাপ্তাহিক ‘অমৃতবাজার’ পত্রিকায় প্রথম প্রকাশিত হয় এবং সাহিত্যামোদীদের নিকট ব্যাপক প্রশংসা অর্জন করে। পরবর্তীকালে ‘রাজধানী নৈপথ্য’ রিপোর্টার. ভি. আই. পি এবং পার্লামেন্ট স্টীট নামক চারখানি উপন্যাস ঐ একই পত্রিকায় প্রকাশিত হয়। এরপর থেকে সাংবাদিকতার পাশাপাশি নিমাই ভট্টাচার্য পূর্ণোদ্যমে আরো আরো উপন্যাস লেখা শুরু করেন।
নিমাই ভট্টাচার্যের লেখা উপন্যাসগুলোতে বিষয়গত বৈচিত্র্যতার ছাপ প্রস্ফূটিত হয়ে উঠেছে। কোন কোন উপন্যাসে তিনি রাজধানীর অন্দর মহলের অন্ধকারে লুকিয়ে থাকা অভিজাত সমাজের কুৎসিত রূপের চিত্র তুলে ধরেছেন। কোথাও নীচু তলার মানুষের সুখ-দুঃখের জীবনকাহিনী চিত্রিত হয়েছে। তাঁর লেখায় কোথাও কোথাও অন্যায়ের বিরুদ্ধে সোচ্চার প্রতিবাদও লক্ষ্য করা যায়। আবার অনেক উপন্যাসে সোনালী আনন্দ দিনের বিলাপ লক্ষ্যণীয়। তাঁর লিখিত উপন্যাসগুলো সাহিত্যরস সমৃদ্ধ ও সুখপাঠ্য।