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कुछ और नज्में

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icluded in this editionm, gulzar's best nazams

177 pages, Hardcover

First published January 1, 2008

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About the author

Gulzar

174 books27 followers

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3 (2%)
1 star
2 (1%)
Displaying 1 - 6 of 6 reviews
Profile Image for Shashank Joshi.
1 review1 follower
September 26, 2012
कुछ और नज्में महज़ एक किताब नहीं जिसे पढ़ा और भुला दिया! इसमें लिखी नज्में आँखों से होती हुई दिल के रास्ते सीधी रूह में उतर जाती हैं! एक तो गुलज़ार का अंदाजे बयाँ और उस पर उनकी कलम की करामात......

"मुझको भी तरकीब सिखा यार जुलाहे....." और "चाँद क्यूँ अब्र की उस मैली सी गठरी में छुपा था..." जैसी नज्में गुलज़ार साहब का जादू ही तो है, जहाँ रिश्तों की गिरहों को सुलझाने जैसा काम हो या फिर वहसीयत से भरी दुनिया का दोगला रंग दिखाने की कोशिश; ये सब इतनी सादगी के साथ गुलज़ार ही लिख सकते हैं और बड़ी मासूमियत से झंझोड़ देते हैं पढने वाले की रूह को, की जैसे ज़लालत के मूंह पर प्यार से तमाचा मारा हो!

एक और खूबी है साहब की वो है "त्रिवेणी"... अब मेरी तरह आप भी इस खूबी से सहमत हो तो चर्चा करने का मज़ा ही कुछ और है! शेरों - शायरी, नज्में और कविता लिखने वाले तो हजारों हैं पर साहब की तरह "त्रिवेणी" को इजाद कर कम शब्दों की सीमा में पूरी बात पिरो देना ऐसा गुर हर कोई नहीं जनता! महज तीन लाइनों में सवाल को उठा कर फेंक देना फलक तक और वहीं से पटकना ज़मीं पर उसी के उत्तर के साथ ये है त्रिवेणी की विशेषता और यहीं से उपजता है नशा गुलज़ार को पढने का!

एक त्रिवेणी यहाँ पेशे खिदमत है :-

"रात के पेड़ पे कल ही देखा था
चाँद, बस, पक के गिरने वाला था

सूरज आया था, ज़रा उसकी तलाशी लेना "

इतनी मासूमियत से भरी इस त्रिवेणी को एक बार पढने भर से ही अंदाज़ लग जाता है की साहब खुद तो गुलज़ार है पर साथ ही उनकी कलम से हमारा साहित्य गुले गुलज़ार है.......

जिसने गुलज़ार को पढ़ा हो, तो निवेदन है कृपया यहाँ अपना अनुभव जरूर बांटे और जो वंचित रह गया है कहीं किसी कोने में, तो बस एक बार रूबरू हो कर देखें! दावा है, फिर इस नशेमन से छूट नहीं पाओगे......
Profile Image for Neeta Sirvi.
129 reviews
October 28, 2021
गलत लोग तो साहब सबकी ज़िन्दगी मे आते है और वाही गलत लोग हमें सही सबक दे जाते है !

अच्छी किताबें और अच्छे लोग तुरंत समज मे नहीं आते है , उन्हें पढ़ना पढ़ता है ।

Gulzar is not just a name, it is a sentiment, it is a story that everyone wants to hear again and again, it is an emotion. Reading his book just once is not enough.

Feeling blissful !! Another faboulous read. Recommended to all.
Profile Image for Zeeshan Ahmed.
84 reviews82 followers
March 21, 2015
Beautiful, just beautiful. Loved it. Gulzar is an all-time favourite, and this only added to my admiration and love for this great man.
Profile Image for Swagatam Deva Nath.
76 reviews3 followers
January 1, 2025
Awesome collection of 100+ poems and trivenis. The binding, pages and typesetting is awesome. And what can i say about the content! Gulzar naam hi kaafi hai...
Displaying 1 - 6 of 6 reviews

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