पुस्तक में, ओशो द्वारा बताए गए जीवन जीने के सूत्र, ओशो क्या कहना चाहते हैं, इशारे को पकड़ें, उंगली को न पकड़ें, समझें जैसे साँप भूतल से बाहर आता है, वैसे ही जैसे आप पुराने से मुक्त हो अपने जीवन जीने के तरीके में संस्कार परिवर्तन के लिए संकल्प करें, अपने भाग्य में दुःख, तनाव और चिंता में विश्वास न करें और आनंदित जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ें।
"जीवन जीने की कला" , मेरे द्वारा ओशो की पढ़ी गयी पहली किताब है l ये ओशो के प्रवचनों और उनकी कुछ दूसरी किताबों के अंश मिला कर बनाई गई किताब है l इस तरह की किताब के बारे में स्टार देना यही है की अगर एक बात भी आपको जम जाती है या आपके दिल में उतर जाती है तो किताब फाइव स्टार वाली हो जाती है l मै ओशो की दूसरी किताब पढ़ना चाहूंगा और इसे भी दुबारा पढूंगा l