Jump to ratings and reviews
Rate this book

Duniya Jise Kehte Hain

Rate this book
निदा फ़ाज़ली उन दिनों से हिन्दी पाठकों के प्रिय हैं, जिन दिनों हिन्दी के पाठक मीर, ग़ालिब, इकबाल फ़िराक़, आदि के अलावा शायद ही किसी नये उर्दू शायर को जानते हों। आठवें दशक के आरम्भ में ही उनके अनेक शेर हिन्दी की लाखों की संख्या में छपने वाली पत्रिकाओं धर्मयुग, सारिका आदि के माध्यम से हिन्दी पाठकों के बीच लोकप्रिय हो चुके थे और अधिकांश हिन्दी पाठक उन्हें हिन्दी का ही कवि समझते थे।
'दुनिया जिसे कहते हैं', में उनकी प्रसिद्ध और प्रतिनिधि ग़ज़लों और नज़्मों को शामिल किया गया है। बहुत-सी रचनाएँ हिन्दी के पाठकों को पहली बार पढ़ने को मिलेंगी। प्रयास किया गया है कि उनकी श्रेष्ठ रचनाओं का एक प्रामाणिक संकलन देवनागरी में सामने आए।

284 pages, Paperback

Published June 15, 2016

5 people are currently reading
53 people want to read

About the author

Nida Fazil

1 book

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
17 (47%)
4 stars
16 (44%)
3 stars
3 (8%)
2 stars
0 (0%)
1 star
0 (0%)
Displaying 1 - 5 of 5 reviews
Profile Image for Guttu.
182 reviews36 followers
December 8, 2020
बचपन में एक गाना सुना था और वो अभी भी कभी कबार याद आता है. "तमन्ना" फिल्म का वो गाना है 

"घर से मश्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर ले,
 किसी रोते हुये बच्चे को हसाया जाये"

कभी ये जानने कीी कोशिश ही नही की वो किसने लिखा था. यह किताब पढकर आखिरकार जवाब मिल गया. फजली जी की शायरी में बहुत गहरायी है. कभी कभी साहीर भी नजर आते है इनकी शायरी में. पढते पढते इस किताब से मुझे बहुत ऐसे शेर मिले है जिन्हे मै अपने करीब रखनेवाला हूँ.

"कभी-कभी यूँ भी हमने, अपने जी को बहलाया है
जिन बातों को ख़ुद नहीं समझे, औरों को समझाया है"

"शायद कुछ दिन और लगेंगे ज़ख़्म-ए-दिल के भरने में
जो अक्सर याद आते थे वो कभी-कभी याद आते हैं"

ये वो शायरी है जो अपने दर्द को जुबाँ देती है. जरुर पढियेगा.
Profile Image for Ravi Prakash.
Author 57 books78 followers
April 19, 2019
बहुत ही मुक़म्मल किताब है खुद में। निदा फ़ाज़ली की ग़ज़ले, अशआर, दोहे, कविताएं, और उनके द्वारा लिखे गए फिल्मी नग़मों को भी इस किताब में संजोया गया है। सबसे अहम बात जो है इस किताब की वो है रचनाओं में वैराइटी- फॉर्म और कंटेंट दोनों में। निदा फ़ाज़ली की बहुत से रचनाएं लीक से हटकर है।
2,142 reviews28 followers
August 12, 2021
................................................................................................
................................................................................................
दुनिया जिसे कहते हैं by निदा फ़ाज़ली.
Duniya Jise Kehte Hain by Nida Fazil
................................................................................................
................................................................................................


Elusively familiar.
................................................................................................


"बशीर बद्र के अलावा वे ही आखिरी प्रमुख शायर थे। अब आगे वाली पीढ़ी बौनों की है। अपने स्तर का एक बड़ा शायर चला गया, बड़ा अफ़सोस होता है यह सोचकर।"
................................................................................................


"मुँह की बात सुने हर कोई, दिल के दर्द को जाने कौन
"आवाज़ों के बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन

"सदियों-सदियों वही तमाशा, रस्ता-रस्ता लम्बी खोज
"लेकिन जब हम मिल जाते हैं खो जाता है जाने कौन

"जाने क्या-क्या बोल रहा था सरहद, प्यार, किताबें, ख़ून
"कल मेरी नींदों में छुपकर जाग रहा था जाने कौन

"मैं उसकी परछाई हूँ या वो मेरा आईना है
"मेरे ही घर में रहता है मेरे जैसा जाने कौन

"किरन-किरन अलसाता सूरज, पलक-पलक खुलती नींदें
"धीमे-धीमे बिखर रहा है ज़र्रा-ज़र्रा1 जाने कौन"
................................................................................................


"अपना ग़म ले के कहीं और न जाया जाये
"घर में बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाये

"जिन चिराग़ों को हवाओं का कोई ख़ौफ़ नहीं
"उन चिराग़ों को हवाओं से बचाया जाये

"क्या हुआ शहर को कुछ भी तो नज़र आये कहीं
"यूँ किया जाये कभी ख़ुद को रुलाया जाये

"बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते हैं
"किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाये

"ख़ुदकुशी करने की हिम्मत नहीं होती सब में
"और कुछ दिन अभी औरों को सताया जाये

"घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें
"किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाये"
................................................................................................


"वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में
"जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नहीं जाता"
................................................................................................
................................................................................................

................................................
................................................
August 12, 2021 - August 12, 2021.

दुनिया जिसे कहते हैं

कॉपीराइट © 2016, निदा फ़ाज़ली

ISBN 978-81-8322-736-0
................................................
................................................

................................................................................................
................................................................................................
Profile Image for Neha Singh.
30 reviews7 followers
January 6, 2021

It’s a collection of Nida Fazli’s work. Books like these are like shadow spots in hot and sultry summer. In the age of information overload and very many opinions, it helps you sit back and ponder about life, love & much more. Just about right to keep you in perspective. One may have read or heard a few of his famous couplets but there’s still so much to discover!
Profile Image for Umang Jethva.
102 reviews30 followers
June 27, 2019
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता...

Brilliant collection of nazms, shers, ghazals of Nida Fazli ji!!
Displaying 1 - 5 of 5 reviews

Can't find what you're looking for?

Get help and learn more about the design.