डॉ. बशीर बद्र के शेरों में जज़्बे और एहसास की जो घुलावट मिलती है वो उन्हें दूसरे शायरों से न सिर्फ़ अलग करती है - बल्कि उनमें ग़ज़ल की आम लफ़ज़ियात से शऊरी गुरेज़ और इर्द गिर्द के माहौल से उनकी ज़ेहनी कुर्बत उन तब्दीलियों का इशारा बनती है जो बाद में ज़्यादा सफ़ाई और चतुराई के साथ उनकी ग़ज़ल की शिनाख़्त मानी जाती है . बशीर बद्र की आवाज़ दूर से पहचानी जाती है .
डॉ. बशीर बद्र के शेरों में जज्बे और एहसास की भनक है जो उन्हे दूसरे शायरों से जुदा करती है। नए शायरों का जब भी जिक्र हो, बशीर बद्र का नाम और कलाम रोशन जरूर होगा। उनकी शायरी में एक गहराई है और नजाकत भी। वो रोजमर्रा की भी बातें करते हैं और फलसफी गजल भी लिखते हैं।
यहां लिबास की कीमत है आदमी की नहीं मुझे गिलास बड़े दे, शराब कम कर दे।
दर्दमंद जज्बाती शायर तो हैं ही, उनका अपना एक खूबसूरत लहजा है जिससे उनकी आवाज दूर से पहचानी जाती है। सादे अल्फाजों से अपनी गजलों और शायरी में मोहब्बतों की बातें पिरोने का उनका अपना ही फन है।
कभी तो आसमान से चांद उतरे जाम हो जाए तुम्हारे नाम की इक खूबसूरत शाम हो जाए अजब हालात थे यूं दिल का सौदा हो गया आखिर मोहब्बत की हवेली जिस तरह नीलाम हो जाए समंदर के सफर में इस तरह आवाज दो हमको हवाएं तेज हो और कश्तियों में शाम हो जाए उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए...
Quote from the Book I Liked - 'उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, ना जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए |' (Page no.III)
&
'यारों सोना चाँदी बो कर, सोना चाँदी काटो, जाओ हमने आंसुओं की खेती की, नैन नगर आबाद किया है |' (Page no. 197)
Rating - 4.5 Stars
*Important take from the book* - 'आँखे खोल के बाहे डालो, यूँ खो जाना ठीक नहीं, नाग भी लिपटे रहते है पीपल कि नरम जटाओं में |' (Page no. 196)
Summary - डॉ. बशीर बद्र के शेरों में जज़्बे और एहसास की जो घुलावट मिलती है वो उन्हें दूसरे शायरों से न सिर्फ़ अलग करती है बल्कि उनमें ग़ज़ल की आम लफ़ज़ियात से शऊरी गुरेज़ और इर्द गिर्द के माहौल से उनकी ज़ेहनी कुर्बत उन तब्दीलियों का इशारा बनती है जो बाद में ज़्यादा सफ़ाई और चतुराई के साथ उनकी ग़ज़ल की शिनाख़्त मानी जाती है . बशीर बद्र की आवाज़ दूर से पहचानी जाती है .
My Review - Bashir Bard, the first time I heard his name was while browsing on social media and finding a clip of actor 'Vijay Raaz' in the movie 'Dedh Ishqiya'. Where he recited one of the famous poems by Bashir Badr - 'यहा लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं मुझे ग्लास बड़ा दे शराब कम करदे |' I was awestruck by the use of words and the metaphorical way by which he conveyed the message in a very beautifully woven way. That was the moment and then there is today. Even after reading a complete book filled with his written work, I can't get enough of it. From pain to comic to love, the book I guess portrayed every emotion via the means of the ever-royal, ever-engrossing beauty of Urdu. I would soo love to read more of his work in future as well. His writing stirs the soul of the reader and I hope more and more fall for his words and engross in the beauty of Urdu.
Conclusion - Beautiful, relatable and just can't get enough of it.
Most iconic one-liners and poetic wisdom from Bashir Badr sahab which could help you understand the world and gather the courage to believe in yourself. You'll see the wrongs in the world & be able to think better. And if you don't feel the same then it's okay, it's life... We're all still trying to understand it