भारतीय दलित पैन्थर मात्रा महारों या नवबौद्धों का ही संगठन नहीं है, इस कारण उसे जातीय संगठन कहना गलत होगा। पैन्थर में प्रमुखतः महार और नवबौद्ध युवाओं का समावेश होता है, क्योंकि महार समाज अन्य समाजों की तुलना में संख्या के मामले में काफ़ी बड़ा समाज है। इस समाज का आम्बेडकरप्रणीत विचारों और आन्दोलन का इतिहास है। शिक्षा में यह समाज अग्रणी है। धर्मान्तर के कारण महार समाज में पुरानी रीतियों-रूढ़ियों-परम्पराओं एवं दासता के विरोध में विद्रोह होते रहे हैं। महार समाज के अनेक लोग ब्रिटिश सेना में कार्यरत थे। उपर्युक्त सभी बातों के मद्देनज़र महार समाज अन्य बहिष्कृत जातियों से सभी स्तरों पर नेतृत्व की भूमिका में अग्रणी रहा है। दलित पैन्थर दलित समाज का संगठन है। यह संगठन दलितों पर हो रहे अत्याचारों के विरोध के फलस्वरूप आत्मरक्षा के लिए उत्पन्न हुआ संगठन है। इसी कारण जिस समाज पर अन्याय होता है, उस दलित समाज का पक्ष लेना ही इस संगठन की ऐतिहासिक जिम्मेवारी है। इसे कभी भी 'जातिवाद' अभियान से सम्बोधित नहीं किया जा सकता । -प्रस्तावना से