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मेरे बाद

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'मेरे बाद' राहत इंदौरी के गजलों का संकलन है. शायरी में अल्फाज कैसे झूमते हैं, ये देखना हो या दिल के खत पर दस्तखत कैसे किए जाते हैं, ये जानना हो या फिर कठिन से कठिन बात को साधारण तरीके से कहने की कला सीखनी हो, तो ये सारी चीजें एक ही व्यक्तित्व में मिल जाएंगी और वो हैं राहत इंदौरी.

गहरी से गहरी बात को आसानी से कह देने का जटिल हुनर जाननेवाले राहत भाई से मेरा बड़ा लम्बा परिचय है। मुशायरे या कवि-सम्मेलन में वे कमल के पत्ते पर बूँद की तरह रहते हैं। पत्ता हिलता है, झंझावात आते हैं, बूँद पत्ते से नहीं गिरती। कई बार कवि और शायर कार्यक्रम शुरू होने से पहले मंच पर आसन जमा लेते हैं, लेकिन इस नए कॉरपोरेट ज़माने में चूँकि कवि-सम्मेलन या मुशायरा एक शो या इवैंट की तरह हैं, तो शुरुआत से पहले आमतौर से शायर हज़रात मंच के पीछे खड़े रहते हैं। नाम के साथ एक-एक करके उनको पुकारा जाता है, तब मंच पर आते हैं। जिस शायर के लिए खूब देर तक खूब सारी तालियाँ बजती रहती हैं, उनका नाम है राहत इन्दौरी। एक अध्यापक जैसे सादा लिबास में वे आते हैं, जो बिलकुल शायराना नहीं होता। तालियों के प्रत्युत्तर में वे हल्का सा झुककर सामईन को आदाब करते हैं और बैठने के लिए अपनी सुविधा की जगह देखते हैं, वैसे उन्हें पालथी मारकर बैठने में भी कोई गुरेज़ नहीं होता। एक बेपरवाही भी शाइस्तगी के साथ मंच पर बैठती है, जब राहत भाई बैठते हैं। आमतौर से हथेली को गद्दे से टिका देते हैं। मैं कई बार उनके गाढ़े साँवले सीधे हाथ को, जिसको वे टिकाते हैं, देर तक देखता रहता हूँ, उसकी अँगूठियों को निहारता हूँ और उँगली अँगूठे के पोरों को देखता हूँ कि कितनी खुश होती होगी वह $कलम जब इस हाथ से अशआर निकलते होंगे। ऐसे अशआर जिनकी जि़न्दगी बहुत तवील है, बहुत लम्बी है। राहत साहब जब माइक पर आते हैं तो लगता है कि ये ज़मीन से जुड़ा हुआ आदमी कुछ इस तरह खड़ा है कि ज़मीन खुश है और वो जब हाथ ऊपर उठाते हैं तो लगता है कि आसमान छू रहे हैं। वे तालियों से बहुत खुश हो जाएँ या अपने अशआर सुनाते वक्त तालियों की अपेक्षा रखें, ऐसा नहीं होता। उनका अन्दाज़, उनके अल्फाज़, उनकी अदायगी, ज़बान पर उनकी पकड़, उनकी आवाज़ का थ्रो, उनके हाथों का संचालन, माइक से दूर और पास आने की उनकी कला, शब्द की अन्तिम ध्वनि को खींचने का उनका कौशल, एक पंक्ति को कई बार दोहरा कर सोचने का समय देने की होशियारी, एक भी शब्द कहीं ज़ाया न हो जाए इसकी सावधानी, न कोई भूमिका और न उपसंहार, अगर होते हैं तो सिर्फ और सिर्फ अशआर। बहुत नहीं सुनाते हैं, लेकिन जो सुना जाते हैं, वह कम नहीं लगता। क्योंकि वे जो सुना गए, उस पर सोचने के लिए कई गुना वक्त ज़रूरी होता है। वे सामईन को स्तब्ध कर देते हैं। वे अपने जादू की तैयारी नहीं करते, लेकिन जब डायस पर आ जाते हैं तो उनका जादू सिर चढ़कर बोलता है। राहत इन्दौरी का होना एक होना होता है। वे अपनी निज की अनोखी शैली हैं, दुनिया-भर के सैकड़ों शायर उनका अनुकरण करते हैं, लेकिन सिर्फ कहन की शैली से क्या होता है, शैली के पीछे सोच और समझ का व्यापक भंडार भी तो होना चाहिए। 'जुगनुओं ने फिर अँधेरों से लड़ाई जीत ली, चाँद, सूरज घर के रौशनदान में रखे रहे' ये शेर ये बताता है कि उनके अन्दर इतना हौसला है कि कायनात से चाँद-सूरज को उठाकर वे अपने रौशनदान में रख सकते हैं। रौशनदान दोनों तरफ उजाला करता है। घर के अन्दर भी और घर के बाहर भी। अगर वे सूरज, चाँद हैं तो। मुझे लगता है कि राहत इन्दौरी एक रौशनदान हैं, जो आभ्यन्तर लोक को भी दैदिप्यमान करते हैं तो बहिर्लोक को भी चुंधिया देते हैं। बहुत लम्बी चर्चा की जा सकती है राहत भाई के बारे में वो कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के लिए एक राहत हैं, एक धरोहर हैं क्योंकि वे सामईन की चाहत हैं। मैं दुआ करता हूँ कि राहत भाई कवि-सम्मेलन और मुशायरों को स्तरीय बनाए रखने में अपना योगदान दीर्घकाल तक देते रहें...! —अशोक चक्रधर

91 pages, Paperback

Published November 17, 2016

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About the author

Rahat Indori

22 books36 followers

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2 (2%)
Displaying 1 - 6 of 6 reviews
Profile Image for Anurag Kumar.
14 reviews
January 9, 2021
"कई बार ऐसा लगता है की ये अज़ीम शायर लफ़्ज़ों के ज़रिये पेंटिंग कर रहा है। उनमे अपने भावों और विचारों के रंग भरकर सामने ला रहा है|"
Profile Image for Vishwanath Rathod.
76 reviews12 followers
November 20, 2019
Few poems and shayaris in many poems are really good. Undoubtedly Rahat Indori is one best living poet.
हमसे पूछो के ग़ज़ल मांगती है कितना लहू,
सब समझते हैं ये धंधा बड़े आराम का है।
प्यास अगर मेरी बुझा दे तो मैं मानू, . वरना,
तू समन्दर है तो होगा, मेरे किस काम का है?

You can feel the intensity of words and emotions
Profile Image for Soumitro Roy.
117 reviews
January 8, 2018
Rare are the poets who are to be watched live rather read in books because there is more to poetry, (to be specific, shayari,) than mere words and prints.

I don't know much about Urdu, Hindi and Gazal but what little Hindi I can understand I came to the conclusion that Indori is a common man's poet. His shers incorporate almost everything, be it God, love, government, young age, old age, time or any theme that poetry can touch and beyond.

Moreover Indori concentrates on reaching the mass while mantaining the class and he does it like a master. He puts his own images from the known world around us, images that are too close to us but we never looked. He also builds his own words and phrases, which is important for a poet.

In the end, I think, Indori is one of the best performer we have in our time and this book is only a glass of this intoxicating wine. Once you read/hear him you ask for more.
Profile Image for Kshitiz Goliya.
119 reviews8 followers
July 12, 2017
Rahat saab continues to be the best of poets I have read till now. The poems here, like his previous book, are mainly addressing the themes of existentialism, urban migration and loss of identity. He continues to rediscover these themes in every successive poem.
Profile Image for SUMIT'S LIBRARY .
9 reviews
February 14, 2022
'मेरे बाद' राहत साहब का एक उम्दा काव्य संग्रह है। जिसमें उन्होंने विभिन्न पहलुओं जैसे- मोहब्बत, बेरोजगारी,सत्ता की आलोचना आदि।पर लिखा है।
जरूर पढ़े आपको आनन्द की अनुभूति होगी
Displaying 1 - 6 of 6 reviews

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