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Samved
सामवेद-'सामवेद' को 'ऋग्वेद' का पूरक कहा जाता है. इस रूप में इस की महत्ता 'ऋग्वेद' से किसी भी तरह काम नहीं मानी जा सकती. इसीलिए यह वेदत्रयी में गिना जाता है. गीता में उपदेशक कृष्ण ने 'वेदानां सामवेदोअस्मि' कह कर सामवेद की विशिष्ट्ता की ओर ही संकेत किया है. सामवेद का प्रस्तुत अनुवाद सायण भाष्य पर आधारित है, क्यूंकि सायणाचार्य ने वैदिक ऋचाओं को समझने के लिए परंपरागत ज्ञान, तर्क एवं मनन का पूरापुरा सहारा लिया था. इस से भी बड़ी बात यह है कि उन्होंने अन्य आचार्यो की तरह सामवेद की ऋचाओं को किसी 'विशेष वाद' का चश्मा पहन कर नहीं देखा है, बल्कि उन के प्रसंगानुसार मानव जीवन से संबंधित अर्थ ही दिए हैं.
304 pages, Hardcover
Published January 1, 2002
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July 2, 2026
This Ved praises various Devs and teaches us how to be humble.
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