#49 मेरी प्रिय कहानियां _ भगवतीचरण वर्मा
कुल 14 कहानियों का संग्रह है जिसे लेखक ने स्वयं चुना है।
दो पहलू
कुंवर साहब का कुत्ता
प्रायश्चित
दो बांके
तिजारत का नया तरीका
रहस्य और रहस्योद्घाटन
प्रेजेण्ट्स
खिलावन का नरक
कायरता उत्तरदायित्व
नाज़िर मुंशी
आवारे
राख और चिनगारी
सौदा हाथ से निकल गया
प्रायश्चित कहानी हमारे छठी या सातवी क्लास की हिंदी किताब में हुआ करती थी। जहां कबरी बिल्ली रामू की बहु की हाथों मारी जाती है और पंडित जी प्रायश्चित करने के लिए 11 तोले सोने की बिल्ली और न जाने क्या क्या मांगते है। बचपन की कहानी तो याद आई ही पढ़ते समय मुस्कान बनी रही। कुछ कहानी हंसती गुदगुदाती है तो कुछ गंभीरता से सोचने पर मजबूर करती है।
पण्डित परमसुख को जब यह खबर मिली, उस समय वे पूजा कर रहे थे। खबर पाते ही वे उठ पडे़—पण्डिताइन से मुस्कराते हुए बोले, “भोजन न बनाना, लाला घासीराम की पतोहू ने बिल्ली मार डाली है, प्रायश्चित होगा, पकवानों पर हाथ लगेगा।” पण्डित परमसुख चौबे छोटे से आदमी थे। लम्बाई चार फुट दस इंच और तोंद का घेरा अट्ठावन इंच! चेहरा गोल-मटोल, मूंछें बड़ी-बड़ी, रंग गोरा, चोटी कमर तक पहुंचती हुई। कहा जाता है कि मथुरा में जब पंसेरी खुराक वाले पण्डितों को ढूंढा जाता था तो पण्डित परमसुख को उस लिस्ट में प्रथम स्थान दिया जाता था। पण्डित परमसुख पहुंचे और कोरम पूरा हुआ। पंचायत बैठी—सासजी, मिसरानी, किसनू की मां, छन्नू की दादी और पण्डित परमसुख! बाकी स्त्रियां बहू से सहानुभूति प्रकट कर रही थीं।
बहुत ही साधारण भाषा में लिखी गई ये कहानियां जीवन का विविध रंग लिए हुए है। हर कहानी अपने आप में अनूठी है और अलग अलग रंगों की तरह अलग अलग प्रभाव छोड़ जाती है।
भूमिका में स्वयं वर्मा जी कहते है।
आज के युग में कहानी ही साहित्य की एकमात्र लोकप्रिय विधा के रूप में रह गई है—चाहे वह उपन्यास के रूप में हो या छोटी कहानी के रूप में। आज के साहित्य को देखकर मुझे यह स्वीकार करना पड़ता है। कविता का युग जाता रहा है। अमूर्त भावना, वह भी प्रचलित कविता की मान्यताओं के अनुसार, बिना छन्द और लय के सहारे, अलंकारों एवं अनुप्रासों से रिक्त—साधारण पाठक इस कविता को ग्रहण करने के लिए तैयार नहीं।
लेकिन यह अमूर्त भावना की परम्परा कहानी के क्षेत्र में भी आ रही है, आज के कहानी के क्षेत्र को देखकर मुझे यह स्वीकार करना पड़ता है। यह युग ही संत्रास और कुण्ठा का है, अनगिनत समस्याएं मनुष्य को घेरे हुए हैं। आज लिखी जाने वाली कहानियाँ या तो इस संत्रास और कुण्ठा को प्रतिबिम्बित करती हैं या फिर आज की समस्याओं का शास्त्रीय विश्लेषण करती हैं। यह बात मुझे इसलिए कहनी पड़ रही हैं कि मेरी कहानियों में युग की कुण्ठा और संत्रास के दर्शन नहीं होंगे। वैसे आज की समस्याएं मेरी कहानिया के में है, लेकिन उन समस्याओं का भावना-पक्ष देने में मैंने विश्वास किया है, कुछ इस तरह कि उससे पाठकों का मनोरंजन हो सके; उन समस्याओं का निदान मेरे पास नहीं है। अपनी इस कमी को स्वीकार करने में मुझे संकोच नहीं होता।
कहानी के कुछ अंश
और उसने देखा कि सारी प्रकृति उसकी प्रसन्नता से हँस रही है। चिड़ियां चहक रही थीं और मोगरा महक रहा था और सुबह की ठण्डी हवा अपनी मस्ती के साथ सौरभ से अठखेलियां कर रही थी और आम के बौरों में बौराई हुई कोयल भी पंचम की अलाप भरने में बेसुध थी।
अगर आपके पास रुपया है तो आप बड़े मजे में कुत्ता पाल सकते हैं; कुत्ता ही क्यों, घोड़ा, भालू, शेर सभी कुछ पाल सकते हैं। यही नहीं बल्कि आप अपने मकान को ज़ू बना सकते हैं और आपकी ओर कोई उंगली नहीं उठा सकता। मानी हुई बात है कि मुझे हरीश का कुंवर साहब और उनके कुत्तों को गालियां देते हुए, गांधीवाद से लेकर साम्यवाद तक के सिद्धातों पर घण्टे-भर तक व्याख्यान देना बुरा ही लगा।