शिवानी नारी जीवन व उसके मन की पर्तों को गहराई से उद्घाटित करने वाली विषयवस्तु के कारण हिन्दी की महिला कथाकारों में अपना विशिष्ट स्थान रखती हैं। उनकी कहानियों की संख्या लगभग 100 के आसपास होगी। कहानियों की मुख्य पात्र भी स्त्रियां ही हैं। विषयवस्तु की दृष्टि से उनकी कहानियाँ संवेदना की गहराई में जाकर समाज के यथार्थ को सामने लाती हैं। उनकी कहानियाँ पाठकों का मनोरंजन तो करती ही हैं साथ ही उन्हें झकझोरती भी हैं।
(1923– 2003) was one of the popular Hindi magazine story writers of the 20th century and a pioneer in writing Indian women based fiction. She was awarded the Padma Shri for her contribution to Hindi literature in 1982. Almost all of her works are in print today and widely available across India.
She garnered a massive following in the pre-television 60s and 70s, as her literary works were serialised in Hindi magazines like Dharmayug and Saptahik Hindustan, and in TV serials n films.
Upon her death in 2003, Government of India described her contributions to Hindi literature as, “…in the death of Shivani the Hindi literature world has lost a popular and eminent novelist and the void is difficult to fill”
दिसम्बर की मज्जा तक ठिठुरा देनेवाली ठंड में, छत पर बैठ, पहाड़ों की हल्की-हल्की धूप के साथ, चूख का आनंद उठाते हुए अगर शिवानी (गौरा पंत) का उपन्यास मिल जाय, तो एक कुमाऊँनी की मानो जिंदगी सफल हो गई!!!!
शिवानी की प्रिय कहानियां, मेरी भी प्रिय बन चुकी हैं। उनकी हर कहानी एक अलग नजरिए से लिखी हुई है, हर एक शब्द ऐसे चुना है मानो अर्थहीन माला में अमूल्य मोती पिरोए जा रहें हो!
उनकी भूमिका के अंतर्गत आया प्रत्येक वाक्य मेरे मन एवं मास्तिष्क, दोनों को छू गया। "यदि मेरी कहानियों में, मेरे उपन्यासों में कुमायूं के प्रति मेरे मोह का स्वर रह-रहकर मुखर हो उठता है, तो मुझे आश्चर्य नहीं होता किन्तु मेरे आलोचकों की दृष्टि में मेरा यही सबसे बड़ा दोष है। मेरे लिए तो कुमायूं के प्रत्येक सूर्योदय एवं सूर्यास्त की निजी मौलिकता है।" आगे वे कहती हैं, कि विधाता ने उन्हें कुमाऊं में जन्म लेने के सौभाग्य से वंचित रखा। मैं शिवानी जी से पूर्णतः सहमत हूँ कि विधाता हर कुमाऊँनी को यह सुख बांट नहीं पाते हैं। परंतु विधाता की लीला अपरम्पार है, हम कुमाऊं में जन्म ले या न ले, विधाता ये ज़रूर सुनिश्चित करते हैं कि हमारे हृदय में हमारी भूमि के प्रति अथाह स्नेह उजागर हो, जैसा कि मेरे साथ हुआ!
इस किताब में शिवानी जी की ८ अद्भुत कहानियां हैं। "के" से लेकर "चीलगाड़ी" तक, "सती" से लेकर "ज्येष्ठा" तक, हर कहानी अनोखे अंदाज़ में लिखी गई है और अपने वक्त के हिसाब से काफी दूरदर्शी प्रतीत होती हैं। "के" एक घरेलू पुरुष तथा कामकाजी महिला की कहानी है, "चीलगाड़ी" में एक विधवा लड़की कि सास उसे पढ़ाकर आसमान कि अनगिनत ऊंचाइयों तक पहुंचाती है वहीं दूसरी ओर "सती" नामक पाठ के अंतर्गत आने वाली कहानी के विषय में कोई सोच भी नहीं सकता! "पुष्पहार" तथा "शपथ" अपने व्यक्तिगत विषयों का नया पहलू प्रस्तुत करती हैं और "अपराधी कौन" व "करिए छिमा" पाठकों को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा देती हैं।
अंत में मैं यही कहना चाहूंगी कि, शिवानी जी के हाथों में लेखनी आते ही हिंदी साहत्य की अलौकिक कृत्यों कि रचना स्वयं ही हो जाती है!
"सम्पूर्ण भारत-दर्शन कर लेने पर भी, हेमन्तकालीन घाम और उत्तराखंडी सूरज की विदा लेती किरनों की गुनगुनी धूप के प्रति मेरा मोह वैसा ही बना रहा है, और यह मेरा दृढ़ विश्वास है कि कुमायूँ कथांचल के उदार अर्णव-से मसिपात्र में लेखनी डुबो-डुबोकर निरंतर लिखते रहने पर भी, ब्रह्मा के नाभिकुंड स्थित अमृत की भाँति, उसका अशेष कोष, कभी रिक्त नहीं हो सकता।" मेरा भी यही विश्वास है!!
दिसम्बर की मज्जा तक ठिठुरा देनेवाली ठंड में, छत पर बैठ, पहाड़ों की हल्की-हल्की धूप के साथ, चूख का आनंद उठाते हुए अगर शिवानी (गौरा पंत) का उपन्यास मिल जाय, तो एक कुमाऊँनी की मानो जिंदगी सफल हो गई!!!!
शिवानी की प्रिय कहानियां, मेरी भी प्रिय बन चुकी हैं। उनकी हर कहानी एक अलग नजरिए से लिखी हुई है, हर एक शब्द ऐसे चुना है मानो अर्थहीन माला में अमूल्य मोती पिरोए जा रहें हो!
उनकी भूमिका के अंतर्गत आया प्रत्येक वाक्य मेरे मन एवं मास्तिष्क, दोनों को छू गया। "यदि मेरी कहानियों में, मेरे उपन्यासों में कुमायूं के प्रति मेरे मोह का स्वर रह-रहकर मुखर हो उठता है, तो मुझे आश्चर्य नहीं होता किन्तु मेरे आलोचकों की दृष्टि में मेरा यही सबसे बड़ा दोष है। मेरे लिए तो कुमायूं के प्रत्येक सूर्योदय एवं सूर्यास्त की निजी मौलिकता है।" आगे वे कहती हैं, कि विधाता ने उन्हें कुमाऊं में जन्म लेने के सौभाग्य से वंचित रखा। मैं शिवानी जी से पूर्णतः सहमत हूँ कि विधाता हर कुमाऊँनी को यह सुख बांट नहीं पाते हैं। परंतु विधाता की लीला अपरम्पार है, हम कुमाऊं में जन्म ले या न ले, विधाता ये ज़रूर सुनिश्चित करते हैं कि हमारे हृदय में हमारी भूमि के प्रति अथाह स्नेह उजागर हो, जैसा कि मेरे साथ हुआ!
इस किताब में शिवानी जी की ८ अद्भुत कहानियां हैं। "के" से लेकर "चीलगाड़ी" तक, "सती" से लेकर "ज्येष्ठा" तक, हर कहानी अनोखे अंदाज़ में लिखी गई है और अपने वक्त के हिसाब से काफी दूरदर्शी प्रतीत होती हैं। "के" एक घरेलू पुरुष तथा कामकाजी महिला की कहानी है, "चीलगाड़ी" में एक विधवा लड़की कि सास उसे पढ़ाकर आसमान कि अनगिनत ऊंचाइयों तक पहुंचाती है वहीं दूसरी ओर "सती" नामक पाठ के अंतर्गत आने वाली कहानी के विषय में कोई सोच भी नहीं सकता! "पुष्पहार" तथा "शपथ" अपने व्यक्तिगत विषयों का नया पहलू प्रस्तुत करती हैं और "अपराधी कौन" व "करिए छिमा" पाठकों को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा देती हैं।
अंत में मैं यही कहना चाहूंगी कि, शिवानी जी के हाथों में लेखनी आते ही हिंदी साहत्य की अलौकिक कृत्यों कि रचना स्वयं ही हो जाती है!
"सम्पूर्ण भारत-दर्शन कर लेने पर भी, हेमन्तकालीन घाम और उत्तराखंडी सूरज की विदा लेती किरनों की गुनगुनी धूप के प्रति मेरा मोह वैसा ही बना रहा है, और यह मेरा दृढ़ विश्वास है कि कुमायूँ कथांचल के उदार अर्णव-से मसिपात्र में लेखनी डुबो-डुबोकर निरंतर लिखते रहने पर भी, ब्रह्मा के नाभिकुंड स्थित अमृत की भाँति, उसका अशेष कोष, कभी रिक्त नहीं हो सकता।" मेरा भी यही विश्वास है!!
I was acquainted with Shivani's writing through her novels but never got the chance to read short stories. The focus of her stories is representation of domestic-mountainous lifestyle especially when the technology hadn't paved its way through the Himalayas. I was initially apprehensive to pick up her short stories because I feared that short stories may not have the scope of detailing which was a prime factor in her her novels. However, I am glad I was wrong because she had some Pahari magic wherein the balance was well managed in every story this collection had (8 in this case).
I would suggest to initiate with short stories and then moving on to novels.
One last thing, the command on Hindi Language (reading, in particular) has to be good because some of the sentences and words were authentic and specific to the language.
Giving four stars for the first short story in the book. Kariye chhima. A woman’s story written by the pen of a woman. Sati and shapath were engaging too. The rest are a mixed affair.