इस किताब को पढ़ने के विभिन्न लोगों के विभिन्न कारण हो सकते हैं लेकिन उन सब कारणों में से सबसे ज़रूरी यह है कि दलित समाज के संघर्षों को इतने पास और इतनी बारीकी से उकेरने वाली कहानी इतनी आसानी से नहीं मिलती। उपन्यास में प्रत्येक घटना इतने प्रामाणिक रूप से उस समय के सामाजिक ढांचे को प्रस्तुत करती है कि पाठक खुद को उस समाज का एक अंग महसूस करने से रोक नहीं पाता। काली की चाची की अन्धविश्वास की वजह से मृत्यु हो जाना, नन्द सिंह का बार-बार धर्म परिवर्तन, ज्ञानो और काली का प्रेम संघर्ष और उनकी दुखद परिणति, हम इन सब संघर्षों के साक्षी तो नहीं हो सकते लेकिन मानवीय स्तर पर एक दूसरे वर्ग को समझने और उनकी वेदना को अपने ह्रदय में जगह देने का एक मौका यह किताब हमें देती है।
जगदीश चन्द्र का यह उपन्यास सही मायनों में प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाता हुआ उपन्यास है। वर्ग संघर्ष को सटीक रूप से दर्शाने वाले बहुत ही कम उपन्यास उपलब्ध है लेकिन जगदीश जी का यह उपन्यास इस विषय पर मील का पत्थर है। पंजाब की पृष्टभूमि पर रचा गया यह उपन्यास केवल पंजाब ही नहीं बल्कि तत्कालीन समूचे ग्रामीण भारत में व्याप्त दुराचार, अंधविश्वास और वर्ग संघर्ष को हमारे समक्ष प्रस्तुत करता है।
Kali or gyano ki dukh prem or struggle se bhri kahani jo indian society k bne norms m na kavel do premi blki do strong logo ko v bdal k rakh dete h . Har kahani k kod p rona or emotional hona swabhavik hai.