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धरती धन न अपना

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264 pages, Paperback

Published January 1, 2013

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3 (15%)
1 star
2 (10%)
Displaying 1 - 5 of 5 reviews
Profile Image for Puneet Kusum.
8 reviews
January 2, 2018
इस किताब को पढ़ने के विभिन्न लोगों के विभिन्न कारण हो सकते हैं लेकिन उन सब कारणों में से सबसे ज़रूरी यह है कि दलित समाज के संघर्षों को इतने पास और इतनी बारीकी से उकेरने वाली कहानी इतनी आसानी से नहीं मिलती। उपन्यास में प्रत्येक घटना इतने प्रामाणिक रूप से उस समय के सामाजिक ढांचे को प्रस्तुत करती है कि पाठक खुद को उस समाज का एक अंग महसूस करने से रोक नहीं पाता। काली की चाची की अन्धविश्वास की वजह से मृत्यु हो जाना, नन्द सिंह का बार-बार धर्म परिवर्तन, ज्ञानो और काली का प्रेम संघर्ष और उनकी दुखद परिणति, हम इन सब संघर्षों के साक्षी तो नहीं हो सकते लेकिन मानवीय स्तर पर एक दूसरे वर्ग को समझने और उनकी वेदना को अपने ह्रदय में जगह देने का एक मौका यह किताब हमें देती है।

Check full review here: http://poshampa.org/dharti-dhan-na-apna/
Profile Image for Sudeep Kumar Mishra.
19 reviews5 followers
September 15, 2020
जगदीश चन्द्र का यह उपन्यास सही मायनों में प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाता हुआ उपन्यास है। वर्ग संघर्ष को सटीक रूप से दर्शाने वाले बहुत ही कम उपन्यास उपलब्ध है लेकिन जगदीश जी का यह उपन्यास इस विषय पर मील का पत्थर है। पंजाब की पृष्टभूमि पर रचा गया यह उपन्यास केवल पंजाब ही नहीं बल्कि तत्कालीन समूचे ग्रामीण भारत में व्याप्त दुराचार, अंधविश्वास और वर्ग संघर्ष को हमारे समक्ष प्रस्तुत करता है।
9 reviews
March 10, 2025
Kali or gyano ki dukh prem or struggle se bhri kahani jo indian society k bne norms m na kavel do premi blki do strong logo ko v bdal k rakh dete h . Har kahani k kod p rona or emotional hona swabhavik hai.
Profile Image for Shashank Bharatiya.
Author 4 books22 followers
April 23, 2019
दलित जीवन की एक सच्ची तस्वीर।
Displaying 1 - 5 of 5 reviews

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