Every Love Story Has A Different Angle, Which One is Yours? Welcome to the world of Just Like That. Have you ever fallen in love? Have you ever been in crush with someone? Or, have you ever failed in love? Did someone leave you behind with tears or your love is still with you? If the answer to any of these is yes, then JUST LIKE THAT is for you... ना टूटे कोई इस कदर इश्क में कि जिस्म से रूह जुदा हो जाए, कोई ऐसा हमसफ़र मिल जाए जो ज़िन्दगी में हमेशा साथ निभाये. प्यार को किसी Definition की जरूरत नही होती और ना ही किसी वादे की, प्यार को सिर्फ उन हाथों की जरुरत होती है जो आपको आपकी आखिरी साँसों तक थामे रहे, इसे ही तो सच्चा प्यार कहते है. .. Welcome to the world of Just Like That ! जस्ट लाइक दैट ... एक लव बुक है जिसमे तीन लव स्टोरीज है. नुक्कड़ वाला लव , कॉलेज वाला लव , लाइफटाइम वाला लव, इसमें लव के अलग अलग एंगल्स को दिखाने का प्रयास किया है जो कि रियल लाइफ से इंस्पायर्ड है, जिसे लेखक ने अपने आस पास अपने दोस्तों और अपनी लाइफ में हो रही घटनाओं से लिया है. ये किताब प्यार दोस्ती और फरेब की दास्तान को बयान करने वाली ऐसी किताब है जिसे हर वो शख्स अपनी उस लाइफ से जोड़ पायेगा जिसने कभी कही किसी से इश्क किया है. चाहे वो एक तरफा लव हो या दो तरफ़ा, चाहे वो नुक्कड़ और मोहल्लों वाला लव हो या ऑफिस वाला या कॉलेज में किया हुआ कोई लव. हर प्रकार के लव को बयान करने वाली किताब है जस्ट लाइक दैट .!!! So Lets Make Your Love Strong With Just Like That, Coz Love Should be good! If It's bad It's Not Love ....
Mithilesh Gupta has written this book beautifully. In fact more from the lovers and emotional point of view. I liked the book very much specially the college romance story and I felt emotional at some place. It is a hindi romance novel which is light in read. Welcome to the world of just like that where you will get the chance of reading love through different angle. Every love story has a different angle. Which one is yours? The cover page is beautiful and suits the story. Overall it is a light read who want to see his/her side of love.
समीक्षा:- जस्ट लाइक दैट लेखक:- मिथिलेश गुप्ता समीक्षक:- सजल सहाय सबसे पहले तो मैं ये बात बता दूं कि मुझे रोमांस नोवेल्स में कुछ खास रुचि नही थी, लेकिन जस्ट लाइक दैट की बहुत तारीफ सुनी थी सो ले ली, सोचा की हो सकता है कि मुझे अच्छी लगे। और मुझे ये किताब काफी अच्छी लगी और कुछ किरदारों ने खासा प्रभावित भी किया। नुक्कड़ वाला लव मुझे उतना अच्छा नही लगा, लेकिन कॉलेज वाला लव बहुत अच्छा था और लाइफटाइम वाला लव तो और ज़बरदस्त था। ये आजकल की जनरेशन की सबसे बड़ी प्रॉब्लम को साफ दिखाता है, की आजकल के काफी लोग प्यार और वासना में फर्क करना नही जानते। अब आते हैं अलग अलग कहानियों पे। नुक्कड़ वाला लव:- ये आजकल बहुत आम हो गया है, कुछ लोग बाइक के पीछे लड़की बिठा की घुमाने में अपनी शान समझते हैं, और एक रिलेशन का गूढ़ मतलब नही जानते, ऐसे लोग हमें अपनी गली के कोनो में भी साफ दिख जाते हैं कितना काम सिर्फ ताड़ना होता है। एक लड़की चली गयी तो दूसरी है ना, ये इनका मूल मंत्र होता है। शुरू में मुझे कहानी उतनी अच्छी नही लगी, लेकिन अब देखता हूँ तो पता चलता है की इसे दिखाना भी काफी अहम था, क्योंकि आज का युवा वर्ग(सारे नही) इसकी चपेट में है। मुझे ऐसा लगता है कि कहानी अगर थोड़ी और लम्बी होती तो ज़्यादा निखर के आती और हम उन किरदारों से ज़्यादा अच्छे से जुड़ पाते तो शायद ये ज़्यादा प्रभाव छोड़ती। कॉलेज वाला लव:- ये ही एक लव स्टोरी है हैप्पी एंडिंग वाली, और मुझे अच्छी लगी। और देखा जाए तो ये एक बहुत ही आदर्श स्तिथि वाली लव स्टोरी है, ये हमे एक दूसरे की गलतियों को भूल कर ज़िन्दगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। अगर देखा जाए तो सारे कपल्स अगर ऐसे हों तो इश्क़ फरेबियों की दुकान ही बंद हो जाये, लेकिन अफसोस बहुत से केसेस में ऐसा हो नही पाता है, और जो अक्सर होता है, वो हमें आगे की कहानी में दिखाया गया है। लाइफटाइम वाला लव:- वाह! टाइटल पढ़ कर ही ऐसा प्रतीत होता है कि एक खूबसूरत अंत वाली कहानी होगी, लेकिन सबसे ज़्यादा इमोशनल यही थी, "लाइफटाइम वाला लव" टाइटल पढ़कर ये कतई दिमाग मे नही आया था कि प्यार ऐसा भी हो सकता है, जिसकी यादें हम भुलाना चाहे लेकिन वो ज़िन्दगी भर हमारे मन को कचोटते रहें। और ना चाहते हुए भी हमारे यादों में लाइफटाइम बसी रहे। अफसोस कि बात ये है कि आज की दुनिया मे जहाँ ज़्यादातर लवस्टोरीज़ कॉलेज वाला लव की तरह खत्म होनी चाहिए, वो लाइफटाइम वाले लव की तरह खत्म होती है और ये बहुत दुखद है।
मेरी स्टार रेटिंग:- 4/5
अब बात करते हैं कि मेरी लव स्टोरी मुझे इसमे मिली कि नही, तो जवाब है नही, क्योंकि मेरी लाइफ में अभी तक गर्लफ्रैंड नाम की मटेरियल की एंट्री ही नही हुई है 😂😂😂।(देखते हैं, अभी कॉलेज जाना बाकी है 😜😜😜) इससे एक बात याद आयी कि आलेख ने मुझे आगे किताब पढ़ने में भी खूब प्रोत्साहित किया था, वो तो ज़बरदस्त था । लैंग्वेज की बात करें तो इसमें कई जगह इंग्लिश प्रयोग की गई है, अगर थोड़ी कम होती तो मुझे ज़्यादा अच्छा लगता। कुछ त्रुटियां भी थी, लेकिन उनसे ज़्यादा फर्क नही पड़ रहा था, सिवाय एक के, यहाँ फिजिक को बार बार फिजिक्स लिखा हुआ है, और मैं साइंस का स्टूडेंट होने के कारण जब जब पड़ता था तो मेरी हँसी छूट जाती थी 😂😂😂। शायद अब इसका अगला एडिशन निकले तो वो ठीक हो।
और अंत मे एक ही चीज़ कहना चाहूँगा मोहिनी....मोहिनी.....मोहिनी....😍😍😍