व्यंग्य से भरपूर कहानी है यह। समाज की वास्तविकता के कुछ पहलुओं को व्यंग्यात्मक ढंग से इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि बहुत गंभीर बातें भी हँसने को मजबूर कर देती हैं। यह व्यंग्य है- शिक्षा प्रणाली पर, प्रेमी-प्रेमीका संबन्धों पर, देश की राजनीति पर, नालायक विद्यार्थीयों द्वारा परीक्षा में पास होने के अनैतिक तरीकों पर, परीक्षा में असफल हो जाने पर उठाए जाने वाले कदमों पर, चापलूसी पर, आरक्षण पर, रिश्वतखोरी एवं मुफ्तखोरी पर और जाति-प्रथा पर। 'कुर्सी पर दीमक' जैसे मुहावरे का शाब्दिक अर्थ, आत्महत्या के लिए waiting और 'आत्महत्या अधिकारी' जैसे पद का होना हँसा कर ही छोड़ता है। इस कहानी के सभी पात्र हमारे समाज की कुंठाओं के प्रतीक के रूप में उभरे हैं। हरिशंकर परसाई जी व्यंग्य लेखन के लिए जाने जाते हैं और इस पुस्तक का एक एक शब्द हँसाने के साथ ही सोचने को विवश करता है। बहुत बढ़िया पुस्तक है यह। व्यंग्य पसंद करने वालों को ज़रूर पढ़नी चाहिए।