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Second Chance

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नौजवान कैजाद पैलोंजी एक ईमानदार, काबिल, खूब ऊँचे आदर्शों वाला जुनूनी पत्रकार था जो फिर अपनी इन्हीं ख़ास 'खामियों' के जियादत के सदके तीन साल जेल की सजा काटकर अब बतौर एक्स-जेलबर्ड बाहर निकला था| आगे अपनी उस बेतरतीब उलझी, बेपनाह बिखरी पड़ी जिन्दगी को किसी सिरे लगाने की कोशिश में उसे एक मामूली फ़ोन कॉल के बदले पांच करोड़ का ऑफर मिला, जिसे उसने फ़ौरन लपका|

वो पहले भी एक मौका अपनी बेजा जिद और बेवकूफी में गँवा चुका था लेकिन अब जिन्दगी ने उसे दिया था - 'सेकंड चांस'|

316 pages, Paperback

Published January 1, 2017

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Kanwal Sharma

18 books6 followers

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Profile Image for विकास 'अंजान'.
Author 9 books44 followers
August 5, 2018
2.5/5
कँवल शर्मा जी का उपन्यास सेकंड चांस पढ़ा। उपन्यास पठनीय है और एक बार पढ़ा जा सकता है।
भाषा की बात करूँ तो उपन्यास को पढ़ते हुए पता लगता है कि कँवल जी की भाषा के ऊपर मजबूत पकड़ है। वो वाक्यों को खूबसूरती से लिखते हैं और पाठक को पढ़ने के लिए ऐसे कई नगीने दे देते हैं जिन्हें पढ़कर कुछ देर उन पर विचार करने को मजबूर हो जाता है।
कमियों की बात करूँ तो इसमें थोड़ा स्ट्रक्चर की दिक्कत मुझे लगी। थोड़े पृष्ठ भी घटाए जा सकते थे। अगर किरदारों का हल्का खाका खींचने के बाद सीधे अपराध से उपन्यास शुरू करते और पीछे की चीजों के लिए फ़्लैश बैक का इस्तेमाल करते तो शायद उपन्यास के कथानक की रफ्तार तेज होती।
बाकी विस्तृत तौर पर मैंने ब्लॉग में एक लेख लिखा है। उसमें मन में जो बातें उठी उनके विषय में लिखा है। अगर विस्तृत तौर पर पढना चाहते हैं तो उधर जाकर पढ़ सकते हैं:
सेकंड चांस
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