Vrindavan Lal verma was a Hindi novelist and playwright. He was honoured with Padma Bhushan for his literary works. Agra University presented him with honorary D. Lit. He received Soviet Land Nehru Award and the government India also awarded him for his novel, Jhansi Ki Rani.
ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर और उनकी रानी मृगनयनी के प्रेम पर आधारित वृंदावन लाल वर्मा जी की ये ऐतिहासिक उपन्यास बहुत ही सुंदर है। राजा का कला प्रेम और कर्तव्य पर उनका मार्ग प्रशस्त करती उनकी रानी। उसकी सखी लाखी जो समाज के जात-पात से टकराती अपने शौर्य से उच्च आदर्श स्थापित करती है। भोला अटल जो प्रेम और कर्तव्य पर अपना जीवन उत्सर्ग कर देता है। वर्मा जी ने ना केवल उस समय की राजनीतिक-धार्मिक-सामाजिक परिस्थितियों, ग्वालियर का मुगल और मालवा आक्रांताओं से अपने राज्य की रक्षा करने की कहानी का विवरण किया है, अपितु कथा के द्वारा कला-कर्तव्य, सौंदर्य-शौर्य, धर्म-प्रेम के बीच जीवन के ताने-बाने को भी कुशलता से दर्शाया है।