मंगलेश डबराल जी आज के समय की सबसे सार्थक और मजबूत आवाज़ों में से हैं| एक बेजोड़ कवि, संतुलित विचार, भाषा पर अद्भुत पकड़, और साधारण ढंग से एक गंभीर बात कहने की क्षमता|
वह कोई बहुत बड़ा मीर था जिसने कहा प्रेम एक भारी पत्थर है कैसे उठेगा तुझ जैसे कमजोर से मैंने सोचा इसे उठाऊं टुकड़ों टुकड़ों में पर तब वह कहां होगा प्रेम वह तो होगा एक हत्याकांड।