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10 प्रतिनिधि कहानियाँ

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Paperback

Published January 1, 2015

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Malti Joshi

35 books15 followers

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Profile Image for Neha Sharma.
36 reviews8 followers
January 29, 2017
मालती जोशी का लिखा पहली बार पढ़ा..बहुत सरलता और सादगी मिली उनके लेखन में..शब्द हों या लेखन शैली आम बोलचाल-सी लगती है पर कहानियों का विषय और कही गयी बातें बेहद गम्भीर।इस किताब की हर कहानी में स्त्री के जीवन और उसके मनोभावों को इतनी अच्छो तरह बताया गया है कि जो लोग कहते हैं स्त्रियों के मन को समझना मुश्किल है उन्हें मालती जोशी की कहानियाँ पढ़नी चाहिए..वो सिर्फ़ स्त्री के पक्ष या उनके गुणों तक ही सीमित नहीं रहतीं बल्कि अक्सर अलग-अलग जगह स्त्रियों के स्वभाव में आने वाले पक्षपात और ग़लतफ़हमियों को भी बख़ूबी सामने लाती हैं..इस किताब में बस एक बात खल गयी वो ये कि एक बेहतरीन कहानी "शापित शैशव"पढ़ते हुए बहुत अच्छे मोड़ पर पता चला कि किताब में से आगे के पन्ने ग़ायब हैं..अधूरी पढ़ी कहानियों से बड़ा दुनिया में कोई मलाल नहीं..कोशिश की जाएगी की किसी तरह उसे पूरा पढ़ा जाए।
Profile Image for Nidhi Arora.
Author 2 books2 followers
May 4, 2023
मालती जोशी जी की कहानियाँ सदा ही मनोहारी होती हैं । सादी, सहज, संवेदनशील, और गहरी। हर कहानी में मर्म है, और मानव मन की गहरी पहचान। किरदार कोई भी हो, किसी आयु का, किसी व्यवसाय का, जीवन के किसी भी पड़ाव पर - उसे बहुत समझ से साथ गढ़ा जाता है - इस प्रकार कि उस चरित्र के विभिन्न रंग भी दिखाई दें, और वह चरित्र लघु कथा में समय भी जाए - यह जादू केवल एक महान कथाकार कर सकता है।

कहानियों में लेखक की सोच निहित है - और वह सोच बहुत परिपक्व है। कहानियाँ केवल अपने समय का दस्तावेज़ नहीं हैं, टिप्पणी भी हैं। टिप्पणी से हम लेखिका के मन की बात समझ पाते हैं। कहीं वह बात हमारे मन से मेल खाती है, कहीं नहीं, पर किसी भी स्थान पर हम यह नहीं कह पाते कि लेखिका ने इस विषय को कम समझा, या कम सोचा है।

ये कहानियाँ रोचक भी हैं, और सोचने पर भी मजबूर करती हैं। कोई कोई कहानी तो सारा दिन साथ बैठी परेशान करती रहती है, सोचने पर मजबूर करती रहती है।

इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें।
Profile Image for gaatha air.
7 reviews
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July 6, 2021
Malti joshi अविस्मरणीय स्तर के संस्मरण भी लिखती हैं। उनका ऐसा ही एक संस्मरणात्मक आत्मकथ्य है - 'इस प्यार को क्या नाम दूं?' वह लिखती हैं - 'इधर एक अभूतपूर्व घटना घटी है। कम से कम मेरे लिए तो यह बहुत ही खास और अहम है। लगभग पच्चीस वर्ष पूर्व की बात है। स्वामी सत्यमित्रानंदजी का कोई कार्यक्रम जबलपुर में था। एक दिन प्रवचन स्थल पर कुछ महिलाओं ने मुझसे सम्पर्क किया। कहा कि हमलोग एक महिला मंडल या कहिए कि लेखिका संघ की स्थापना कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि उसका उद्घाटन आपके हाथों हो। मना करने का कोई प्रश्न नहीं था। मैंने तुरंत हामी भर दी। दूसरे दिन एक सदस्य के घर में अत्यंत घरेलू वातावरण में वह कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
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