Feel good stories.
जैसे dark chocolate bar हौले हौले जीभ और तालू में पिघलता है , वैसे ही ये कहानिया आपके उदासी मन , गुस्से , तीखेपन को पिघला सी देते हैं |
और एक के बाद आप दूसरी कहानी का स्वाद चखने के लिए आगे बढ़ने लगते हो |
हमारी आम जिंदगी से जुडी कहानियां |
कुछ ऐसे बचपन , जो बिन पिता के बड़े हुए हैं ; तो कुछ लोक प्रेम के किस्से जो माप तौल के होते हैं , कुछ रिश्ते जो हम बस ढोते हैं , रिश्ते जो कभी समझ ही नहीं आते और कुछ चुनाव ऐसे- जहाँ कोई स्वार्थ नहीं |
कुछ ऐसे मन के टोकरे जहाँ बरसों पुरानी बातें गठरिया बाँध कर बैठी हो और बात बात पर टुकुर टुकुर कर वर्तमान पर असर डालती हो |
कुछ किस्से ऐसी जहाँ एक औरत अपने भीतर अपने बलात्कार को छिपा लेती है , जो सही नहीं लगता; पर फिर लगता है – घर घर ऐसा ही तो होता है , सब अपने दिल में राज छिपा लेते हैं – डर से , शर्म से , अज्ञान से | खुद के लिए ही खुद से लड़ना कितना मुश्किल लगता है और फिर क्या , जिंदगी की संध्या , कहानी की चरित्र संध्या की तरह ही ढल भी जाती है | बस यूँही – खुद से हारकर
हमारे ज्यादातर रिश्ते ऐसे होते हैं , जिन्हें भाग्य की लकीर कहकर, हम अपनी पूरी जिंदगी बर्बाद कर लेते हैं |
खैर सच तो ये है , कि , हमारे रिश्ते, उनकी करवाहत – सब कुछ स्वार्थ के ही होते हैं , और जिन्हें नहीं पता , वो इन कहानियों को पढ़कर , थोड़ा सजग हो पाएंगे | और जो इस बात को जान गए हैं , वो पाठक अपनी हालत सुधारने के लिए प्रयास में लग जायेंगे |
इन कहानियों के कुछ रिश्तों के किस्से, कभी किसी मोर पर हमें कोई मीठी - करवी याद ताजा कर जायेंगे | वो याद जो कभी एक हलकी सी हंसी की तरह झलकती है या फिर भीतर एक पल के लिए जहर बन उभरती है |
आख़िरकार हर कहानी की कोशिश तो रहती है , हमें अपनी असलियत से मुलाकात कराना , खुद से रूबरू कराना ; ताकि शुरुआत कितनी भी करवी और खट्टी रही हो , हम अपने प्रयासों से उसका अंत मीठा और सुखद कर सकते हैं |
तो चलो फिर, अब आगे बढ़ते हैं |