बेहद दुर्लभ और अद्भुत संस्मरण वाली किताब। क्या तो किस्से और क्या तो पात्र, जब आप ये संस्मरण पढ़ते हैं तो पता चलता हैं के हमारी स्वतंत्रता के ये क्रांतिकारी कितने हमारे जैसे और कितने इंसानी थे। अक्सर हमे लगता हैं जब हम हमारे क्रांतिकारियों के बारे में पढ़ते हैं के इनका जीवन सिर्फ गंभीर रहा होगा पर ये संस्मरण पढ़ कर पता चलता हैं के छोटे से जीवनकाल में क्या सम्पूर्ण अनुभव किया हैं इन महान हस्तियों ने। शिव वर्मा, भगवानदस माहौर और सदाशिव अमरापुरकर ने शहीद राजगुरु, भगत सिंह, सुखदेव, चंद्रशेखर आज़ाद, नारायणदास खरे के साथ बिताए गए समय और भारत की आज़ादी के लिए किए गए संघर्ष के बीच जिए हुए जीवन को जिस तरीक़े से लिखा है, लाजवाब है।
Some very rare stories of the freedom fighters which will surely let you delve deep into how they were in daily life living with friends and enjoying life.