तीन एकांत लेखक निर्मल वर्मा की वो तीन कहानियां हैं जिनका मंचन किया गया। निदेशक देवेंद्र राज ने सत्तर के दशक में लेखक की कहानियों से प्रभावित होकर इनका मंचन किया। ये मंचन एनएसडी में हुआ था। तीनों कहानियां में एकांत या अकेलेपन का एक बोध है। पात्र अपनी अपनी कहानी/आपबीती बयान करते हैं। ऐसा करते हुए आप उनके मन में चल रहे अंतर्द्वंद के करीब आते हैं और आप को इन पात्रों को करीब से समझने का अवसर भी मिलता है।
पहली कहानी "धूप का एक टुकड़ा"एक पब्लिक पार्क से शुरू होती है । एक वृद्ध व्यक्ति पैरेम्बुलेटर के सामने बैठा है, एक लड़की जो वहां बरसों से हर रोज़ आती थी इस बेंच को अपना समझती है। लड़की का आगमन होता है और वो सामने खड़े गिरजा को देखकर अपनी कहानी शूरु करती है। लड़की की कहानी में बहुत से अलग अलग प्रसंग आते हैं और इन सभी को मंच पर अद्भुत तरीके से दर्शाया जाता है।
इसी क्रम की दूसरी कहानी लेखक की प्रिय कहानियों में से एक है, इस कहानी का शीर्षक है "डेढ़ इंच ऊपर"। एक पब से शूरु होने वाली इस कहानी में दो पात्र हैं, एक नशे में धुत व्यक्ति जो बातें करता है और दूसरा सामने बैठा एक श्रोता। नाज़ी पार्टी के अत्याचारों से त्रस्त इस शराबी की अपनी कहानी है जिसमें उसके निजी जीवन में एक अपूर्णीय क्षति होती है। मंचन के दौरान कहानी में निदेशक ने एक बेयरा भी रखा है जो दोनों पात्रों को बीयर सर्व करता है।
तीसरी कहानी "वीकएंड" में एक नायिका अपने ख्यालों में मग्न है। कभी उसके विचार अपने प्रेमी के साथ एक कमरे में बिताये क्षणों में हैं और फ़िर एक पार्क में जब वो प्रेमी की छोटी बेटी से मिलती है। आख़री दृश्य में नायिका कमरे से बाहर निकलती है जबकि प्रेमी सोया हुआ है।
बकौल लेखक इन कहानियों को मंच पर साकार होते देखना एक "विस्मयकारी अनुभव" था।
आगे कहते हैं "जिन कहानियों को अरसा पहले मैंने अपने अकेल कमरे में लिखा था, उन्हें खुले मंच पर दर्शकों के बीच देखना कुछ वैसा ही था जैसे टेपरिकॉर्डर पर अपनी आवाज़ सुनना, जो अपनी होने पर भी अपनी नहीं जान पड़ती। कहानी लिखना बहुत अकेलेपन की चीज़ है। यह सौभाग्य बहुत कम प्राप्त होता है कि खुद अलग रहकर इस अनुभव को दूसरों के साथ बांटा जा सके। " निर्मल वर्मा को नई कहानी आंदोलन का स्तंभ माना जाता है, इन कहानियों में भी उनका कथा शिल्प विद्यमान है। भाषा सरल लेकिन आपको अपने पाश में बांधने वाली है। मैंने ये किताब गीता पुस्तकालय, वाराणसी से मंगवाई, आप भी अपनी प्रति यहां से मंगवा सकते हैं।
लेखक : निर्मल वर्मा
प्रकाशन : वाणी प्रकाशन